जन नायकन विवाद में अदालत ने कहा: विदेशी शक्तियों से ‘टकराव’ संभव, सेना को चाहिए ‘उचित सत्यापन’

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जन नायकन विवाद में अदालत ने कहा: विदेशी शक्तियों से ‘टकराव’ संभव, सेना को चाहिए ‘उचित सत्यापन'

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  • Publish Date - January 28, 2026 / 05:18 PM IST,
    Updated On - January 28, 2026 / 05:18 PM IST

चेन्नई, 28 जनवरी (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है कि प्रमाणन विवाद में फंसी अभिनेता विजय की फिल्म ‘‘जन नायकन’’ में कथित तौर पर देश में टकराव पैदा करने वाली विदेशी शक्तियों के संदर्भ हैं, जो साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा है कि फ़िल्म में सेना से जुड़े उल्लेख भी हैं, इसलिए फिल्म के प्रदर्शन से पहले इन सभी बिंदुओं का सत्यापन करना जरूरी है।

बहुत बड़े बजट की फिल्म की रिलीज को झटका देते हुए, उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एकल पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को फिल्म को तत्काल सेंसर प्रमाण-पत्र प्रदान करने का निर्देश दिया गया था।

विस्तृत आदेश बुधवार को उपलब्ध कराया गया।

मुख्य न्यायाधीश एम. एम. श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने 27 जनवरी के अपने आदेश में, सीबीएफसी की वह अपील मंजूर कर ली, जिसमें न्यायमूर्ति पी टी आशा के नौ जनवरी, 2026 के आदेश को चुनौती दी गई थी।

एकल पीठ ने बोर्ड अध्यक्ष द्वारा मामले को पुनरीक्षण समिति को भेजने के निर्णय को भी रद्द कर दिया था।

खंडपीठ ने कहा, ‘‘अपीलकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत किए गए रिकॉर्ड का हमने सुनवाई के दौरान अध्ययन किया, जिससे यह प्रतीत होता है कि फिल्म को एक बृहद निकाय ‘पुनरीक्षण समिति’ के समक्ष पड़ताल के लिए भेजने का आधार यह था कि फिल्म में कुछ ऐसे दृश्य और संवाद हैं, जिनमें दिखाया गया है कि विदेशी शक्तियां भारत में बड़े पैमाने पर धार्मिक संघर्ष पैदा कर रही हैं, जिससे धार्मिक सद्भाव बिगड़ सकता है।’’

अदालत ने कहा, ‘‘इसके अलावा, फिल्म में सेना से संबंधित कई संदर्भ हैं, लेकिन इन मुद्दों पर विचार करने के लिए किसी भी रक्षा विशेषज्ञ को शामिल नहीं किया गया है।’’

पीठ ने कहा कि उठाया गया मुद्दा वाकई गंभीर है और स्क्रीनिंग से पहले इसकी उचित पड़ताल आवश्यक है, यही मुख्य कारण प्रतीत होता है कि सीबीएफसी के अध्यक्ष ने फिल्म को पुनरीक्षण समिति के पास जांच के लिए भेजने का निर्णय लिया।

अदालत ने कहा, ‘‘इसलिए, यह और भी आवश्यक था कि अपीलकर्ताओं को अपना प्रतिवाद दाखिल करने और सीबीएफसी के अध्यक्ष द्वारा लिये गए निर्णय का समर्थन करने का उचित अवसर दिया जाए।’’

पीठ ने कहा कि उपरोक्त चर्चा के फलस्वरूप, अपील स्वीकार की जाती है और एकल पीठ द्वारा पारित विवादित आदेश को रद्द किया जाता है। इसने कहा, ‘‘हालांकि, मामले की परिस्थितियों और न्याय के लिए, याचिका खारिज करने के बजाय, हम याचिकाकर्ता/प्रतिवादी (फिल्म ‘जन नायकन’ के निर्माता मेसर्स केवीएन प्रोडक्शंस एलएलपी) को उपरोक्त टिप्पणियों के मद्देनजर याचिका में उचित संशोधन करने का अवसर देना चाहते हैं।’’

पीठ ने कहा, ‘‘रिट याचिका को उसके मूल अभिलेखों और फाइल में बहाल किया जाता है। यदि प्रतिवादी रिट याचिका में उचित संशोधन करता है, तो एकल न्यायाधीश अपीलकर्ताओं (सीबीएफसी) को प्रतिवाद दाखिल करने का उचित अवसर प्रदान कर सकते हैं। हम यह स्पष्ट करते हैं कि एकल न्यायाधीश के विचार के लिए लिए यह विषय खुला रहेगा कि फिल्म को पुनरीक्षण समिति की पड़ताल के वास्ते भेजने का निर्णय कानून के अनुसार था या नहीं।’

भाषा तान्या सुरेश

सुरेश