कांग्रेस ने वायु प्रदूषण पर विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्र से पूछे सवाल

कांग्रेस ने वायु प्रदूषण पर विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्र से पूछे सवाल

  •  
  • Publish Date - January 18, 2026 / 05:33 PM IST,
    Updated On - January 18, 2026 / 05:33 PM IST

नयी दिल्ली, 18 जनवरी (भाषा) कांग्रेस ने प्रदूषण पर विश्व बैंक की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए रविवार को पूछा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार कब तक सच्चाई को मानने से इनकार करती रहेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदूषण से गंगा के मैदानी क्षेत्रों और हिमालय की तलहटी वाले इलाकों में हर साल लगभग दस लाख लोगों की समय से पहले मौत हो जाती है।

कांग्रेस महासचिव (संचार) और पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि उनकी पार्टी वायु प्रदूषण से पैदा हुए स्वास्थ्य संकट को देखते हुए कई उपाय सुझा रही है, जिसमें बिना किसी ढील के नियमों और मानकों को सख्ती से तथा बिना किसी समझौते के लागू करना शामिल है।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा विश्व बैंक की गंगा के मैदानी क्षेत्रों और हिमालय की तलहटी वाले इलाकों में वायु प्रदूषण पर नवीनतम रिपोर्ट ‘ए ब्रेथ ऑफ चेंज’ व्यापक, साक्ष्य आधारित है।

रमेश ने कहा, ‘‘यह रिपोर्ट सही समय पर आई है। इसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि अब इस क्षेत्र में हर साल लगभग 10 लाख लोगों की समय से पहले मौत हो जाती है, जिससे हर साल क्षेत्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 10 प्रतिशत आर्थिक नुकसान भी होता है।’’

कांग्रेस नेता ने कहा कि रिपोर्ट में कई कदम सुझाए गए हैं। इसके तहत कोयला बिजली घरों के उत्सर्जन मानकों का पालन कराना और सबसे पुराने इकाइयों को जल्दी बंद करना, सार्वजनिक परिवहन का विस्तार और विद्युतीकरण करना तथा वाहन उत्सर्जन और ईंधन मानकों को कड़ा करना होगा।

रमेश ने कहा, ‘‘हाल के वर्षों में वायु प्रदूषण से जुड़ा स्वास्थ्य संकट बहुत गंभीर हो गया है। इसे देखते हुए कांग्रेस 1981 के वायु प्रदूषण (नियंत्रण और रोकथाम) अधिनियम और 2009 के राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (एनएएक्यूएस) की समीक्षा करने का सुझाव दे रही है, जिसमें विशेष रूप से पीएम 2.5 पर ध्यान दिया जाए।’’

पूर्व पर्यावरण मंत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने प्रदर्शन के मापदंड के रूप में पीएम 2.5 स्तर को शामिल करते हुए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) का आर्थिक बजट और भौगोलिक क्षेत्र के मामले में व्यापक विस्तार करने का सुझाव दिया है।

उन्होंने कहा कि इसमें बिना किसी छूट या ढील के, वायु प्रदूषण के नियमों और मानकों को सख्ती से और बिना किसी समझौते के लागू करने का भी सुझाव दिया गया है। रमेश ने पूछा, ‘‘मोदी सरकार कब तक सच्चाई से मुंह मोड़े रहेगी?’’

विश्व बैंक की रिपोर्ट कहती है कि गंगा के मैदानी क्षेत्रों और हिमालय के तलहटी वाले इलाकों में वायु प्रदूषण दक्षिण एशिया में स्वास्थ्य और विकास की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इसमें कहा गया, ‘‘लगभग एक अरब लोग हर दिन खतरनाक हवा के संपर्क में आते हैं, जिससे सालाना लगभग दस लाख लोगों की समय से पहले मौत हो जाती है और औसत जीवन प्रत्याशा तीन साल से ज़्यादा कम हो जाती है।’’

कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण के मद्देनजर आई है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) स्तर बहुत ज़्यादा होने से स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।

भाषा आशीष धीरज

धीरज