गुवाहाटी, 30 मार्च (भाषा) कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के परिवार की संपत्ति में पिछले एक दशक में कथित तौर पर हुई भारी वृद्धि पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से उनकी पत्नी की संपत्तियों से संबंधित है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शर्मा ने केवल अपने परिवार के लिए धन जमा करने का काम किया, और राज्य के लोगों के लिए रोज़गार जैसे मुख्य मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं दिया।
श्रीनेत ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मुख्यमंत्री द्वारा अपने चुनावी हलफनामों में साझा की गई जानकारी से यह स्पष्ट है कि पिछले पांच वर्षों में केवल एक व्यक्ति और उसका परिवार ही ‘मालामाल’ हुआ है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि यह ‘‘असम मॉडल’’ के बजाय ‘‘संपत्ति जमा करने का मॉडल’’ है। श्रीनेत ने कहा कि शर्मा की निजी संपत्ति 2016 में 1.02 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.36 करोड़ रुपये हो गई, जबकि उनके पास कोई अचल संपत्ति नहीं थी।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘इसी अवधि के दौरान उनकी पत्नी की संपत्ति 1.77 करोड़ रुपये से बढ़कर 13.59 करोड़ रुपये हो गई।’’
उन्होंने दावा किया कि शर्मा की पत्नी की अचल संपत्ति 2016 में 3.5 करोड़ रुपये थी, जो 2021 में 4.3 करोड़ रुपये हो गई, और 2026 में 19.25 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘संपत्ति का संचय मुख्य रूप से जीवनसाथी की संपत्तियों से होता है, न कि अपनी निजी कमाई से। हम यह जानना चाहते हैं कि ऐसी कौन सी आर्थिक गतिविधि है, जो सार्वजनिक पद पर रहते हुए परिवार की संपत्ति में छह गुना बढ़ोतरी करती है।’’
मुख्यमंत्री द्वारा अपने नाम पर किसी भी संपत्ति की घोषणा न किए जाने पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, ‘‘तीनों हलफनामों में उनके पास कोई अचल संपत्ति नहीं है, फिर भी परिवार की संपत्ति में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है। क्या राजनीतिक सत्ता को स्वामित्व की ज़िम्मेदारी से अलग किया जा रहा है?’’
राज्य में भ्रष्टाचार और रोज़गार के अवसरों की कमी का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री केवल अपने परिवार की संपत्ति जुटाने में व्यस्त हैं। युवाओं में बेरोज़गारी की दर बहुत ज़्यादा है, और रोज़गार देने के लिए कोई बड़ा उद्योग भी नहीं है।’’
भाजपा पर ‘‘सोशल मीडिया के ज़रिए एक सुनहरी तस्वीर पेश करने’’ का आरोप लगाते हुए श्रीनेत ने कहा, ‘‘लेकिन असलियत कुछ और है, तथा लोग इसे जानते हैं।’’
भाषा
नेत्रपाल दिलीप
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