नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत संधू ने यहां आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव दिल्ली (आईएफएफडी) को राष्ट्रीय राजधानी और भारत को ‘क्रिएटिव इकोनॉमी’ का वैश्विक केंद्र बनाने की एक दृष्टि बताते हुए सोमवार को कहा कि यह समारोह राष्ट्रीय राजधानी के सांस्कृतिक भविष्य को दिशा देने वाले एक आंदोलन की नींव है।
‘क्रिएटिव इकोनॉमी’ एक ऐसी आर्थिक प्रणाली को संदर्भित करती है जहाँ रचनात्मकता, विचार, प्रतिभा और बौद्धिक कौशल मूल्य, आय और रोजगार के मुख्य स्रोत होते हैं।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, संधू ने कहा कि भारतीय मिट्टी में जन्मी कहानी दूर देशों के दिलों को छू सकती है और ऐसे मंच उन कहानियों को दुनिया तक पहुंचाने का सेतु बनते हैं।
उन्होंने कहा कि यह एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन की नींव है, जो दिल्ली के सांस्कृतिक भविष्य को दिशा देगा और भारत को वैश्विक रचनात्मक मानचित्र पर और सशक्त बनाएगा।
उपराज्यपाल के मुताबिक, यह फ़िल्म महोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं है, यह दिल्ली और भारत को ‘क्रिएटिव इकोनॉमी’ का वैश्विक केंद्र बनाने की एक दृष्टि है।
उन्होंने फिल्मकारों से कहा, “आप सिर्फ रचनाकार नहीं, आप सांस्कृतिक दूत हैं। सिनेमा केवल फ्रेम्स और स्क्रिप्ट्स नहीं, यह साहस है, दृष्टिकोण है, और सच्चाई है।”
बयान के मुताबिक, कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “दिल्ली देश का हृदय है, एक ऐसा शहर जो इतिहास और आशाओं दोनों को अपने भीतर समेटे हुए है। यह फिल्म महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि राजधानी की नई सांस्कृतिक पहचान को आकार देने का माध्यम है। सिनेमा में लोगों को जोड़ने, प्रेरित करने और सपनों को साकार करने की अद्भुत शक्ति है। यह मंच नए कलाकारों, फिल्म निर्माताओं और विशेष रूप से महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देगा।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि आईएफएफडी दिल्ली को एक वैश्विक सांस्कृतिक और सिनेमाई केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस आयोजन को “ऑरेंज इकोनॉमी” और रचनात्मक उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में एक सशक्त पहल बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महोत्सव केवल सिनेमा का उत्सव नहीं, बल्कि संवाद, नवाचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक जीवंत मंच है, जो दिल्ली को वैश्विक रचनात्मक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
कार्यक्रम में फिल्म निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा, अभिनेता अनुपम खेर, अभिनेत्री भूमि पेडनेकर, दिव्या दत्ता, अर्जन बाजवा सहित देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित फ़िल्म हस्तियां उपस्थित रहीं। निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी को ‘शोले’ के 50 वर्ष पूरे होने पर सम्मानित किया गया।
पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि आईएफएफडी में छह फ़िल्म परियोजनाओं को चयन किया गया, और इस महोत्सव से निकलने वाली तीन फिल्में आने वाले समय में पूरे देश में देखी जाएंगी।
मिश्रा ने फ़िल्म जगत से जुड़े सभी लोगों से आग्रह किया कि देश में 100 करोड़ कमाने वाली फिल्में बनाने के साथ 100 करोड़ लोगों को जगाने वाली फिल्में भी बनाते रहें।
बयान के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान विभिन्न श्रेणियों में सम्मान प्रदान किए गए। फिल्म निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा और आईएफएफडी प्रीव्यू कमेटी के प्रमुख सुनीत टंडन को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही ‘कैपिटल्स प्राइड’ सम्मान के तहत गुणीत मोंगा, दिव्या दत्ता और भूमि पेडनेकर सहित कई प्रमुख हस्तियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
भाषा नोमान जितेंद्र अमित
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