राजस्थान में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे: मुख्यमंत्री शर्मा

राजस्थान में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे: मुख्यमंत्री शर्मा

राजस्थान में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे: मुख्यमंत्री शर्मा
Modified Date: July 12, 2024 / 12:24 pm IST
Published Date: July 12, 2024 12:24 pm IST

जयपुर, 12 जुलाई (भाषा) राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कोयला खंड की भूमि का उपयोग करने की अनुमति दिए जाने पर अपने समकक्ष विष्णु देव साय को धन्यवाद देते हुए शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री शर्मा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘सतत विद्युत आपूर्ति को सुनिश्चित करने हेतु राजस्थान सरकार प्रतिबद्ध है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘छत्तीसगढ़ सरकार ने राजस्थान के बिजलीघरों के लिए कोयले की आपूर्ति हेतु हसदेव अरण्य कोलफील्ड में संचालित परसा ईस्ट एवं कांता बासन (पीईकेबी) कोल ब्लॉक की 91.21 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग करने की अनुमति प्रदान की दी है जिसके लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का समस्त राजस्थान परिवार की ओर से हार्दिक धन्यवाद।’’

उन्होंने कहा कि ‘आपणो अग्रणी राजस्थान’ के संकल्प के अनुरूप राजस्थान में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में हमारी सरकार निरंतर प्रयासरत है।

शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के इस फैसले से राज्य की 4340 मेगावाट क्षमता वाली तापीय विद्युत परियोजनाओं को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित किये जाने में काफी मदद मिलेगी।

इसके साथ ही शर्मा ने मुख्यमंत्री साय से आग्रह किया है कि पीईकेबी कोयला खंड से खनन कार्य निरंतर जारी रखने तथा वित्त वर्ष 2024-25 में 18 एमटीपीए की उत्पादन क्षमता प्राप्त करने के लिए आवश्यक 108 हेक्टेयर भूमि पर वृक्षों की कटाई करवाकर, और वित्त वर्ष 2025-26 से अगले छह वर्षों के खनन कार्यों हेतु आवश्यक 411 हेक्टेयर भूमि पर वृक्षों की कटाई के पश्चात, उक्त भूमि को राजस्‍थान राज्‍य विद्युत प्रसारण निगम (आरवीयूएन) को हस्तांतरित करने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

साथ ही उन्होंने परसा कोयला खंड पर खनन कार्य प्रारंभ करने हेतु संबंधित भूमि पर वृक्षों की कटाई करवाकर उक्त भूमि को आरवीयूएन को हस्तांतरित करने की व्यवस्था करने की मांग है।

भाषा पृथ्वी नरेश खारी

खारी


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