पूर्वानुमान के विपरीत जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश : विश्लेषण

पूर्वानुमान के विपरीत जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश : विश्लेषण

पूर्वानुमान के विपरीत जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश : विश्लेषण
Modified Date: July 30, 2026 / 09:08 pm IST
Published Date: July 30, 2026 9:08 pm IST

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जुलाई में सामान्य से कम वर्षा का पूर्वानुमान जताए जाने के बावजूद इस महीने एक से 26 जुलाई के बीच 233.9 मिलीमीटर (मिमी) की सामान्य वर्षा के मुकाबले 238.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। एक नए विश्लेषण में यह जानकारी दी गई है।

विश्लेषण के अनुसार सामान्य से अधिक वर्षा का एक प्रमुख कारण लगातार बने मानसूनी मौसम तंत्र रहे, जिन्होंने पूरे महीने नियमित अंतराल पर मानसून की गतिविधियों को सक्रिय बनाए रखा।

दिल्ली स्थित जलवायु अनुसंधान संस्था ‘क्लाइमेट ट्रेंड्स’ द्वारा बृहस्पतिवार को जारी इस विश्लेषण में कहा गया है कि इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि जलवायु परिवर्तन और महासागर-वायुमंडल के बदलते पारस्परिक प्रभावों के कारण भारत में मानसून का पूर्वानुमान लगाना पहले की तुलना में अधिक कठिन होता जा रहा है।

आईएमडी के राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनडब्ल्यूएफसी) में वैज्ञानिक डॉ. अखिल श्रीवास्तव ने एक बयान में कहा, ‘‘वैश्विक तापवृद्धि के कारण भूमि की सतह और महासागरों के औसत तापमान में वृद्धि हुई है। ऐसी परिस्थितियों में जब कई मानसूनी तंत्र जैसे अनुकूल हालात बनते हैं, तो वे अधिक नमी ग्रहण करते हैं और इसके परिणामस्वरूप अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना बढ़ जाती है।’’

विश्लेषण में कहा गया है कि जुलाई में सामान्य से अधिक वर्षा ऐसे समय हुई है, जब उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ की स्थिति बनी हुई है।

इसमें कहा गया कि आने वाले महीनों में इन परिस्थितियों के तेजी से मजबूत होने का अनुमान है और सामान्य तौर पर ‘अल नीनो’ के कारण भारत में मानसून की वर्षा कम होती है।

आईएमडी के पूर्व महानिदेशक डॉ. के. जे. रमेश ने एक बयान में कहा कि सामान्य से अधिक वर्षा के पीछे दो प्रमुख कारण रहे।

डॉ. रमेश ने कहा, ‘‘पश्चिमी प्रशांत महासागर (फिलीपीन के पश्चिम) का गर्म होना जुलाई 2026 में ‘अल नीनो’ के कारण मानसूनी वर्षा पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव की भरपाई करते हुए मानसून के लिए सहायक साबित हुआ। अब तक तीन चक्रवाती परिसंचरण म्यांमा के रास्ते आगे बढ़ चुके हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिमी प्रशांत महासागर के चक्रवातों के अवशेष उत्तर बंगाल की खाड़ी में प्रवेश कर फिर से मजबूत हो रहे हैं, जिससे भारतीय प्रायद्वीप में उनके मार्ग के आसपास व्यापक क्षेत्र में भारी वर्षा के साथ मानसून सक्रिय बना हुआ है।’’

डॉ. रमेश ने कहा कि दूसरा प्रमुख कारण मानसून के दौरान पश्चिमी विक्षोभों की बढ़ती सक्रियता है, जिसके कारण अरब सागर से अधिक मात्रा में नमी आई और महाराष्ट्र तथा गुजरात में भारी वर्षा हुई।

उन्होंने कहा, ‘‘ये पश्चिमी विक्षोभ तिब्बत तक पहुंच रहे हैं, जिससे पूर्वी हिमालयी क्षेत्र में वर्षा हो रही है और अंततः असम में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। जलवायु परिवर्तन मानसून की प्रकृति को बदल रहा है।’’

भाषा रवि कांत प्रशांत

प्रशांत


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