अकाल तख्त ने बेअदबी-रोधी कानून पर आपत्तियों को लेकर सरकार के जवाब को ‘असंतोषजनक’ बताकर खारिज किया

अकाल तख्त ने बेअदबी-रोधी कानून पर आपत्तियों को लेकर सरकार के जवाब को ‘असंतोषजनक’ बताकर खारिज किया

अकाल तख्त ने बेअदबी-रोधी कानून पर आपत्तियों को लेकर सरकार के जवाब को ‘असंतोषजनक’ बताकर खारिज किया
Modified Date: July 30, 2026 / 10:37 pm IST
Published Date: July 30, 2026 10:37 pm IST

अमृतसर, 30 जुलाई (भाषा) अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी से संबंधित बेअदबी-रोधी कानून को लेकर पंजाब सरकार के जवाब को बृहस्पतिवार को ‘असंतोषजनक’ करार देते हुए इसे खारित कर दिया और इस मुद्दे पर ‘आप’ सरकार से बातचीत के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करने की घोषणा की।

गड़गज की यह टिप्पणी आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक इंदरबीर सिंह निज्जर द्वारा अकाल तख्त की ओर से ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर पंजाब सरकार का जवाब सौंपने के एक दिन बाद आई।

जत्थेदार गड़गज ने 29 जून को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह एक महीने के भीतर बेअदबी-रोधी कानून से संबंधित आपत्तियों का समाधान करे।

गड़गज ने बृहस्पतिवार को यहां मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए सभी सिख विधायकों और कैबिनेट मंत्रियों को निर्देश दिया कि तीन अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान अकाल तख्त साहिब और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के साथ इस मुद्दे पर सहमति बनने तक बेअदबी-रोधी कानून पर कोई चर्चा नहीं की जाए और कानून में किसी भी अन्य संशोधन को मंजूरी नहीं दी जाए।

मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘‘गुरु द्रोही’’ (गुरु दोखी) घोषित किए जाने के मद्देनजर आगामी विधानसभा सत्र के दौरान सिख विधायकों को किस प्रकार का आचरण करना चाहिए, इस सवाल के जवाब में गड़गज ने कहा कि विधायकों को मुख्यमंत्री के साथ संवाद नहीं करना चाहिए और अपनी बातचीत केवल विधानसभा अध्यक्ष तक सीमित रखनी चाहिए।

सरकार के जवाब का जिक्र करते हुए जत्थेदार ने कहा कि यह स्पष्ट है कि ‘आप’ सरकार अकाल तख्त की भावनाओं के अनुसार कानून में और संशोधन करने को तैयार नहीं है।

उन्होंने कहा कि 29 जून को अकाल तख्त साहिब में पंजाब विधानसभा के सिख विधायकों और कैबिनेट मंत्रियों के बीच बनी सहमति की भावना सरकार के जवाब में नहीं दिखी है।

जत्थेदार ने कहा कि सरकार ने अकाल तख्त द्वारा उठाई गई आपत्तियों और बिंदुओं में से केवल एक को स्वीकार किया है, जबकि बाकी मुद्दों पर उसने कठोर रुख बनाए रखा है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने अपना जवाब भेजने से पहले समय पर बातचीत का कोई मौका नहीं दिया; सरकार का जवाब ‘‘संतोषजनक’’ नहीं है और इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

गड़गज ने कहा कि अगर सरकार इस कानून के बारे में अकाल तख्त के साथ बातचीत जारी रखना चाहती है तो इसके लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की गई है।

उन्होंने कहा कि सरकार को अकाल तख्त की बनाई समिति से संपर्क करना चाहिए और कानून पर आम सहमति बनानी चाहिए और यह काम दो महीने के अंदर पूरा हो जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अकाल तख्त की ओर से बातचीत के दरवाजे खुले हैं लेकिन सरकार को साफ नीयत के साथ आगे बढ़ना चाहिए और किसी भी तरह की चालाकी नहीं करनी चाहिए।

इस बीच, ‘आप’ नेता एवं सांसद मलविंदर सिंह कंग ने बृहस्पतिवार को चंडीगढ़ में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि बेअदबी के खिलाफ कानून का मकसद सिर्फ उन लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाना है जो जानबूझकर ऐसी हरकतें करते हैं और सरकार का सिखों के धार्मिक मामलों में दखल देने का कोई इरादा नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार अकाल तख्त और सभी सिख धार्मिक संस्थानों का बहुत सम्मान करती है।

भाषा सुरभि पवनेश

पवनेश


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