नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने आयकर अधिनियम की धारा 132 के तहत तलाशी और जब्ती की शक्तियों को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया।
याचिका में दावा किया गया था कि अधिकारियों द्वारा ऐसी शक्तियों का दुरुपयोग किया जा सकता है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि ऐसे प्रावधान बड़े कर चोरों से निपटने के लिए बनाए गए हैं।
पीठ ने कहा कि शुरू में यह प्रावधान साधारण लग सकता है, लेकिन इसे बड़े अपराधियों को पकड़ने के लिए बनाया गया है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि कुछ प्रावधान ऐसे भी हैं जिनका दुरुपयोग संभव है, लेकिन समय के साथ उन्हें सुव्यवस्थित कर दिया जाता है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ये प्रावधान अक्सर बड़े कर चोरों आदि के लिए होते हैं।’’
पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े की इस दलील से असहमति जताई कि यह प्रावधान असंवैधानिक है। वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा इस प्रावधान के संबंध में उठाई गई मुख्य चिंता यह थी कि यह कर अधिकारियों को करदाता या आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण को तलाशी के कारणों का खुलासा करने से छूट देता है।
पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और इसके बाद याचिका वापस ले ली गई।
हालांकि, पीठ ने जनहित याचिका के याचिकाकर्ता विश्वप्रसाद अल्वा को प्रावधान में संशोधन या स्पष्टीकरण की मांग करने वाले अभ्यावेदन के साथ केंद्र का रुख करने की अनुमति दे दी।
भाषा संतोष अविनाश
अविनाश