कोलकाता, 28 अप्रैल (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भूमि सौंपने के अपने आदेश का पालन नहीं करने पर राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि 127 किलोमीटर हिस्से में से केवल आठ किलोमीटर का खंड ही अब तक सीमा सुरक्षा बल को दिया गया है।
मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल के नेतृत्व वाली एक खंडपीठ ने गत 27 जनवरी को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह 127 किलोमीटर भूमि 31 मार्च तक बीएसएफ को सौंप दे, जिसे ‘पहले ही अधिग्रहित/खरीदा जा चुका है’, जिसके लिए ‘राज्य सरकार को केंद्र से मुआवजा’ प्राप्त हो चुका है।
नौ जिलों में बीएसएफ को मार्च के अंत तक 127 किलोमीटर की पूरी जमीन नहीं सौंपने के लिए राज्य सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए, उच्च न्यायालय ने 22 अप्रैल को राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें जनवरी के आदेश के अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी हो।
अदालत ने राज्य सरकार द्वारा अदालत के आदेशानुसार 127 किलोमीटर के बजाय केवल आठ किलोमीटर जमीन सौंपे जाने पर असंतोष व्यक्त किया।
अदालत ने टिप्पणी की, ‘यह आश्चर्यजनक और चौंकाने वाला है कि राष्ट्रीय महत्व के मामले में, प्रतिवादी राज्य ने हलफनामे पर अपनी रिपोर्ट दाखिल करना उचित नहीं समझा।’
अदालत ने कहा, ‘‘एक संक्षिप्त और टालमटोल वाली रिपोर्ट दाखिल की गई है जिसमें 27 जनवरी, 2026 को इस अदालत के आदेश के बाद जमीन सौंपने के लिए क्या कार्रवाई की गई है, इसका तिथि और स्थानवार विवरण नहीं दिया गया है।’
अदालत ने अपने पूर्व आदेश का पालन नहीं करने के लिए रिपोर्ट दाखिल करने वाले अधिकारी पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जिसका भुगतान उन्हें स्वयं अपनी जेब से करना होगा।
खंडपीठ में न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन भी शामिल थे। खंडपीठ ने कहा, ‘‘हम इस तरह की टालमटोल वाली और संक्षिप्त रिपोर्ट दाखिल करने की प्रथा की निंदा करते हैं।’
अदालत ने राज्य सरकार को 27 जनवरी के आदेश के अनुपालन में जिलेवार उठाए गए दैनिक कदमों की जानकारी देते हुए विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
खंड पीठ ने निर्देश दिया कि ‘रिपोर्ट में 27 जनवरी के आदेश के बाद बीएसएफ को भूमि सौंपने के लिए प्रत्येक जिले द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख होना चाहिए।’ अदालत ने राज्य को दो सप्ताह के भीतर हलफनामे के रूप में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।
अदालत ने कहा कि यदि पूरी भूमि नहीं सौंपी जा सकी, तो कम से कम अदालत के आदेश का पालन नहीं करने के कारणों को बताना अपेक्षित था। उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि रिपोर्ट में इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
अदालत ने यह टिप्पणी लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रत साहा (सेवानिवृत्त) द्वारा दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए की, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में बीएसएफ को बाड़ लगाने के लिए भूमि सौंपने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
उच्च न्यायालय इस मामले की अगली सुनवाई 13 मई को करेगा।
भाषा अमित पवनेश
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