बिना ठोस तथ्यों के पति के हर रिश्तेदार के खिलाफ आपराधिक मामला शुरू नहीं किया जा सकता: न्यायालय

बिना ठोस तथ्यों के पति के हर रिश्तेदार के खिलाफ आपराधिक मामला शुरू नहीं किया जा सकता: न्यायालय

बिना ठोस तथ्यों के पति के हर रिश्तेदार के खिलाफ आपराधिक मामला शुरू नहीं किया जा सकता: न्यायालय
Modified Date: May 25, 2026 / 08:02 pm IST
Published Date: May 25, 2026 8:02 pm IST

नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वैवाहिक विवादों में केवल सामान्य और बिना ठोस तथ्यों पर आधारित आरोपों के आधार पर पति के हर रिश्तेदार के खिलाफ आपराधिक मामला शुरू नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि घरेलू हिंसा की पीड़िताओं के अधिकार और गरिमा की रक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि बिना स्पष्ट तथ्यात्मक आधार के आपराधिक कानून का दायरा हर परिवार के सदस्य तक न बढ़ाया जाए।

न्यायालय ने यह भी कहा कि जब वैवाहिक संबंध खराब हो जाते हैं और उनमें कड़वाहट आ जाती है, तो अक्सर गुस्से, निराशा या भावनात्मक तनाव के कारण आरोप बढ़ा-चढ़ाकर या बहुत सामान्य तरीके से लगाए जाते हैं।

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा, “हालांकि असफल विवाह में शिकायतकर्ता की पीड़ा को हल्के में नहीं लिया जा सकता, लेकिन केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर पति के हर रिश्तेदार के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करना उचित नहीं है।”

अदालत ने कहा कि न्यायालयों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए और यह अच्छी तरह जांचना चाहिए कि क्या आरोप वास्तव में हर आरोपी के खिलाफ अलग-अलग तरीके से किसी संज्ञेय अपराध को साबित करते हैं या नहीं।

अदालत ने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया, तो आपराधिक प्रक्रिया का इस्तेमाल ही “उत्पीड़न व दुरुपयोग का साधन” बन सकता है।

न्यायालय ने 2023 में मध्य प्रदेश में दर्ज एक प्राथमिकी को रद्द करते समय ये टिप्पणियां कीं। यह प्राथमिकी एक वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में एक व्यक्ति के चार परिजनों के खिलाफ दहेज प्रतिषेध अधिनियम समेत अन्य आरोपों के तहत दर्ज की गई थी।

भाषा जोहेब नरेश

नरेश


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