पश्चिम बंगाल में ‘सांस्कृतिक आपातकाल’, मुझे प्रस्तुति की अनुमति नहीं दी गई: हेमा मालिनी

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पश्चिम बंगाल में ‘सांस्कृतिक आपातकाल’, मुझे प्रस्तुति की अनुमति नहीं दी गई: हेमा मालिनी

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  • Publish Date - April 1, 2026 / 07:27 PM IST,
    Updated On - April 1, 2026 / 07:27 PM IST

नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद और फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी ने पश्चिम बंगाल में ‘सांस्कृतिक आपातकाल’ लागू होने का आरोप लगाते हुए बुधवार को दावा किया कि राज्य में उनकी पहले से निर्धारित नृत्य प्रस्तुति को राज्य सरकार ने बहाने बनाकर आयोजित नहीं होने दिया।

शास्त्रीय नृत्यांगना हेमा मालिनी ने लोकसभा में शून्यकाल में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा, ‘‘मुझे अपनी नृत्य नाटिकाओं से संस्कृति और सांस्कृतिक धरोहरों को समाज के कोने-कोने तक पहुंचाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, जिसे सभी ने राजनीति से उठकर सराहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन देश की सांस्कृतिक दूत होने के नाते आज मैं बहुत दुखी, असहाय महसूस कर रही हूं और नाराज भी हूं कि पश्चिम बंगाल जिसे कला और संस्कृति की राजधानी कहा जाता था, वहां आज राजनीतिक नियंत्रण की छाया है। ऐसा वह सरकार कर रही है जिसे जनता ने अपनी कला, साहित्य और संस्कृति को बचाने के लिए चुना था।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि गत 15 मार्च को कोलकाता में उनकी एक नृत्य प्रस्तुति ‘द्रौपदी बैले’ को आयोजन से दस दिन पहले निरस्त कर दिया गया और उसके लिए कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया, बल्कि तरह-तरह के बहाने बनाए गए।

हेमा मालिनी ने कहा कि जब दूसरे सभागार में कार्यक्रम का प्रयास किया गया तो यह कहकर अनुमति नहीं दी गई कि वहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी कार्यक्रम है, लेकिन जब पता किया तो प्रधानमंत्री का कार्यक्रम स्थल कहीं और था।

भाजपा सांसद ने कहा, ‘‘पिछले आठ-नौ साल से मेरे साथ ऐसा हो रहा है। जब भी कोलकाता में मेरा कार्यक्रम होता है तो कोई बहाना बनाकर रोक दिया जाता है। कहा जाता है कि बहुत भीड़ आएगी और सुरक्षा व्यवस्था नहीं की जा सकती। हम वहां सुरक्षा के बिना प्रस्तुति दे भी नहीं सकते, ऐसा हाल है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार को लगता है कि मैं भाजपा की सांसद हूं तो हमारे कार्यक्रम का भी राजनीतिक मकसद होगा। यह सोचकर कभी आने नहीं दिया आज तक। इस बार भी ऐसा ही किया गया। मेरा कार्यक्रम बिल्कुल राजनीतिक नहीं, बल्कि पूरी तरह आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश वाला था।’’

हेमा मालिनी ने कहा कि एक सांसद होने के नाते उन्हें सुरक्षा मिलने का अधिकार है और इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि जब पांच बार की सांसद को इस तरह की परिस्थिति का सामना करना पड़ता है तो राजनीतिक दलों से जुड़े अन्य कलाकारों के साथ क्या होता होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि बंगाल में राजनीतिक आपातकाल लगा है। केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकार कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अनेक कदम उठा रही हैं, वहीं बंगाल सरकार कलाकारों को दबा रही है।’’

भाजपा सांसद ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार को राजनीति को संस्कृति के साथ नहीं जोड़ना चाहिए।

भाषा वैभव अविनाश

अविनाश