दिल्ली की अदालत ने एक व्यक्ति को यौन उत्पीड़न मामले में बरी किया

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दिल्ली की अदालत ने एक व्यक्ति को यौन उत्पीड़न मामले में बरी किया

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  • Publish Date - March 30, 2026 / 07:54 PM IST,
    Updated On - March 30, 2026 / 07:54 PM IST

नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) अलग-अलग समय पर शिकायतकर्ता द्वारा अलग-अलग बयान देने का हवाला देते हुए दिल्ली की एक अदालत ने एक व्यक्ति को अपने पड़ोस की महिला का यौन उत्पीड़न करने और उसे आपराधिक रूप से धमकाने के आरोप से बरी कर दिया।

अपने हालिया फैसले में, न्यायिक मजिस्ट्रेट अनामिका ने यह भी फैसला सुनाया कि गवाही से भरोसा पैदा नहीं होता है।

अदालत ने 20 मार्च के अपने फैसले में कहा, “शिकायतकर्ता ने जांच और मुकदमे के विभिन्न चरणों में आरोपों के अलग-अलग विवरण दिए हैं। इसलिए शिकायतकर्ता की गवाही विश्वसनीय नहीं है और आरोपी के अपराध को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।”

आरोपी को भारतीय दंड संहिता (भादंसं) की धाराओं– 354 (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 506 (आपराधिक धमकी) और 509 (किसी महिला की गरिमा का अपमान करने के इरादे से किए गए कृत्य) के तहत सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

अदालत ने कहा, “यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता गवाह के बयान में कई विसंगतियां हैं। कथित घटना का कोई अन्य सार्वजनिक गवाह नहीं है। आरोपी की पहचान भी संदेह के घेरे में है क्योंकि शिकायतकर्ता ने अपने अलग-अलग बयानों में अपराध के लिए अलग-अलग लोगों का नाम लिया है।”

अभियोजन पक्ष के अनुसार, जुलाई 2021 में अपने नए अपार्टमेंट में आने के बाद से ही शिकायतकर्ता को आरोपी और उसके साथियों द्वारा यौन उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं का सामना करना पड़ा, जिसमें अश्लील गाने और आपत्तिजनक टिप्पणियां शामिल थीं। मामला उसी वर्ष सितंबर में तब और बिगड़ गया जब उसकी स्कूटी में तोड़फोड़ की गई। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसे छूआ गया।

आरोपी की ओर से वकील प्रशांत दीवान पेश हुए।

शिकायतकर्ता ने शुरू में अपनी शिकायत में कहा था कि बलजीत नामक एक व्यक्ति ने सीढ़ियों पर उसे स्पर्श किया, लेकिन मजिस्ट्रेट के सामने दिए अपने बयान में उसने कहा कि वह उत्पीड़न में शामिल पड़ोसियों के नाम नहीं जानती। उसने मजिस्ट्रेट के सामने घटना का बिल्कुल अलग विवरण भी प्रस्तुत किया।

भाषा राजकुमार संतोष

संतोष