नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने जेल में बंद कार्यकर्ता उमर खालिद को सप्ताह में दो बार परिवार के साथ वीडियो के जरिए बातचीत (ई-मुलाकात) की अनुमति दे दी।
खालिद के वकील ने दावा किया था कि बिना कोई कारण बताए मई 2026 से यह सुविधा दो बार से घटाकर एक बार कर दी गई थी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर वाजपेयी ने कहा कि खालिद पिछले छह वर्ष से इस सुविधा का लाभ ले रहा है और इस दौरान उसने जेल के किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है।
खालिद ने सप्ताह में दो बार वीडियो कॉल के जरिये परिवार से बातचीत की अनुमति देने का अनुरोध करते हुए अर्जी दाखिल की थी, जिसपर अदालत ने यह आदेश जारी किया।
खालिद वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े बड़ी साजिश के मामले में मुकदमे का सामना कर रहा है।
अदालत ने 13 जुलाई को जारी आदेश में कहा, “चूंकि याचिकाकर्ता पिछले छह वर्षों से सप्ताह में दो ‘ई-मुलाकात’ की सुविधा का इस्तेमाल कर रहा है और उसने दिल्ली जेल नियमों के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया है, इसलिए उसे अपनी मां और परिवार के अन्य सदस्यों से बात करने के लिए सप्ताह में दो ई-मुलाकात की अनुमति दी जाती है। ”
खालिद के वकील ने अदालत को बताया कि जेल जाने के बाद से उनके मुवक्किल को हर सप्ताह दो ई-मुलाकात की अनुमति मिलती रही थी, लेकिन मई 2026 से बिना कोई कारण बताए इसे सप्ताह में एक कर दिया गया जबकि उन्होंने जेल के किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया था।
जेल प्रशासन ने इस अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि लागू जेल नियमों के अनुसार खालिद सप्ताह में केवल एक ई-मुलाकात का ही हकदार है।
अदालत ने हालांकि कहा कि खालिद पिछले छह वर्षों से हर सप्ताह दो ई-मुलाकात की सुविधा का लाभ ले रहा है और इस दौरान उसने दिल्ली जेल नियमों के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया है।
खालिद, शरजील इमाम और कई अन्य लोगों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) तथा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
उन पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों का ‘मुख्य साजिशकर्ता’ होने का आरोप है।
भाषा जितेंद्र माधव
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