नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व पुलिस उपनिरीक्षक को वरिष्ठ अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर करके अदालत में आरोप पत्र दायर करने और एक वरिष्ठ अधिकारी को धमकी भरा संदेश भेजने का दोषी पाया है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट सौरभ गोयल ने कहा कि पुलिस अधिकारी की यह कार्रवाई न्यायिक रिकॉर्ड की शुचिता पर हमला है।
उन्होंने दो अप्रैल के आदेश में कहा कि अभियोजन ने यह साबित कर दिया है कि आरोपी उप निरीक्षक कविता माथुर ने सार्वजनिक दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया और इन दस्तावेजों का उपयोग आधिकारिक प्रक्रियाओं को भ्रमित और प्रभावित करने के लिए किया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, माथुर 2015 में पालम गांव थाने में उप निरीक्षक थीं। इस दौरान उन्होंने कई अंतिम रिपोर्ट और आरोप पत्रों में फर्जी तरीके से तत्कालीन सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) एम. हर्षवर्धन और तत्कालीन थाना प्रमुख (एसएचओ) नियती मित्तल कश्यप के हस्ताक्षर तैयार किए। अदालत इस बात पर गौर किया कि अभियुक्त ने यह जानते हुए कि वरिष्ठ अधिकारियों के हस्ताक्षर फर्जी है, इन दस्तावेजों को अदालत में वास्तविक दस्तावेज के रूप में दाखिल किया।
न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में प्रत्यक्ष साक्ष्यों, स्वतंत्र गवाहों की गवाही, सीएफएसल रिपोर्ट, अदालती रिकॉर्ड और अभियुक्त के व्यवहार के आधार पर वह दोषी सिद्ध होती है।
सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब (सीएफएसएल) की रिपोर्ट ने भी पुष्टि की कि दस्तावेजों पर मौजूद हस्ताक्षर संबंधित अधिकारियों के वास्तविक हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाते।
अदालत ने यह भी कहा कि अभियुक्त के पास केस फाइलों की देखरेख होने के कारण दस्तावेजों में हेरफेर करने का अवसर था।
अभियोजन ने यह आरोप भी लगाया कि 23 जुलाई 2015 को माथुर ने एसीपी हर्षवर्धन को मोबाइल पर संदेश भेजा कि प्राथमिकी ने उनका करियर बर्बाद कर दिया है और वह आत्महत्या कर लेंगी।
अदालत ने माना कि यह संदेश अधिकारी को डराने और शिकायत को आगे न बढ़ाने के उद्देश्य से भेजा गया था।
न्यायाधीश ने कहा कि अभियुक्त ने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करते समय अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर वाले दस्तावेज अदालत में दाखिल किए, लिहाजा यह निजी धोखाधड़ी से बढ़कर न्यायिक रिकॉर्ड की शुचिता पर हमला है।
माथुर को सार्वजनिक दस्तावेजों में जालसाजी करने, फर्जी दस्तावेज का वास्तविक दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल करने, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के लिए दोषी ठहराया गया। उनपर भारतीय दंड संहिता की धारा 417, 465, 466, 468 और 471 के साथ 506 भाग-1 के तहत आरोप तय किए गए।
अदालत ने कहा कि सजा पर बहस के लिए अगली सुनवाई बाद में की जाएगी।
भाषा जोहेब दिलीप
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