दिल्ली: प्रधानमंत्री संग्रहालय में संरक्षित छड़ियों और बेंतों की प्रदर्शनी

Ads

दिल्ली: प्रधानमंत्री संग्रहालय में संरक्षित छड़ियों और बेंतों की प्रदर्शनी

  •  
  • Publish Date - July 15, 2026 / 03:49 PM IST,
    Updated On - July 15, 2026 / 03:49 PM IST

(फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के प्रधानमंत्री संग्रहालय परिसर में मंगलवार से शुरू हुई खास प्रदर्शनी में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की कई सजावटी एवं कलात्मक छड़ियां प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें लकड़ी की वह छड़ी भी शामिल है, जिसपर उनकी तस्वीर उकेरी गई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

इस विशेष प्रदर्शनी में संग्रहालय के ‘संरक्षित संग्रह’ से ली गई कुछ चुनिंदा छड़ियों और ‘बेंतों’ का प्रदर्शन किया गया।

प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (पीएमएमएल) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 24 जुलाई तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में लगभग 31 वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं।

उन्होंने कहा कि ‘‘वॉकिंग विद लेगसी’’ नाम से आयोजित इस प्रदर्शनी का मकसद ‘‘इन वस्तुओं की कारीगरी और नेतृत्व, अधिकार, रुतबे एवं व्यक्तिगत पहचान के प्रतीक के तौर पर इनकी भूमिका के साथ-साथ मशहूर नेताओं और जानी-मानी हस्तियों के साथ इनके जुड़ाव को समझने’’ की कोशिश करना है।

संग्रहालय परिसर के पुराने भवन स्थित परिचय दीर्घा में आयोजित इस प्रद्रर्शनी में छड़ी के सहारे चलते महात्मा गांधी की तस्वीरें और मई 2023 में नए संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में हुए सेंगोल (औपचारिक राजदंड) स्थापना समारोह की कुछ तस्वीरें भी प्रदर्शित की गई हैं।

पीएमएमएल यानी प्रधानमंत्री संग्रहालय को अप्रैल 2022 में आम लोगों के लिए खोला गया था।

इससे पहले इसे नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय (एनएमएमएल) के नाम से जाना जाता था। यह मध्य दिल्ली में पुराने तीन मूर्ति भवन परिसर में स्थित है। इस ऐतिहासिक इमारत और इसके विशाल परिसर को 1964 में नेहरू के निधन के बाद एक स्मारक में बदल दिया गया था। यहां उनके जीवन और विरासत से जुड़ी कई वस्तुएं, स्मृति-चिह्न, अभिलेखीय तस्वीरें और दस्तावेज संजोकर रखे गए हैं।

वर्ष 2023 में एनएमएमएल सोसाइटी का नाम बदलकर पीएमएमएल सोसाइटी कर दिया गया।

अधिकारी ने बताया कि ‘‘पीएमएमएल तोशाखाना’’ के खास संग्रह में छड़ियों और बेंत को ‘‘पहचान और शासन के प्रतीक’’ के तौर पर दिखाया गया है और इनके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, कलात्मक और प्रतीकात्मक महत्व को उजागर किया गया है।

तोशाखाना का मतलब आमतौर पर तोहफे में मिली चीजों को रखने का स्थान या संग्रहालय होता है।

भाषा सुरभि सुरेश

सुरेश