नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुजान सिंह पार्क स्थित 7.58 एकड़ परिसर को खाली करने के लिए जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती देने वाली एम्बेसडर होटल के मालिक की याचिका पर बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने को कहा।
न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर ने ‘सर शोभा सिंह एंड संस प्राइवेट लिमिटेड’ की याचिका पर नोटिस जारी किया और केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि उन्हें आशंका है कि 10 जुलाई को बेदखली का आदेश जारी किया जा सकता है। इस मामले की सुनवाई उसी दिन संपदा अधिकारी के समक्ष निर्धारित है।
उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि वह संपदा अधिकारी को निर्देश दे कि मामले में आगे बढ़ने से पहले सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत लोगों की बेदखली) अधिनियम के तहत कार्यवाही की वैधता के मुद्दे पर फैसला किया जाए।
न्यायमूर्ति शंकर ने कार्यवाही की प्रक्रिया में दखल से इनकार कर दिया और कहा, ‘‘वे वैधानिक प्राधिकारी हैं। वे खुद इसका ध्यान रखेंगे।’’
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मैं उन्हें यह निर्देश नहीं देने वाला कि उन्हें अपनी कार्यवाही किस प्रकार संचालित करनी है।’’
केंद्र सरकार के वकील आशीष दीक्षित ने याचिका का विरोध किया और बताया कि याचिकाकर्ता की अर्जियों पर जवाब दाखिल करने के लिए यह मामला 10 जुलाई को संपदा अधिकारी के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
उन्होंने कहा, ‘‘कार्यवाही जारी रह सकती है। उनका कहना है कि कल बेदखली का आदेश जारी होने वाला है। (लेकिन) यह मामला उनकी अर्जियों पर हमारे जवाब दाखिल करने के लिए सूचीबद्ध है।’’
दीक्षित ने यह भी दलील दी कि याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है और संपदा अधिकारी कानून के मुताबिक कार्यवाही कर रहे हैं।
याचिका में, सर शोभा सिंह एंड संस प्राइवेट लिमिटेड ने सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत लोगों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत भूमि एवं विकास कार्यालय के संपदा अधिकारी द्वारा 11 जून को जारी ‘कारण बताओ नोटिस’ को चुनौती दी। इस नोटिस में पूछा गया था कि उन्हें सुजान सिंह पार्क (नॉर्थ) के नाम से जानी जाने वाली 7.58 एकड़ जमीन से क्यों नहीं बेदखल किया जाए।
याचिकाकर्ता की दलील थी कि संपदा अधिकारी के पास इस मामले में आगे बढ़ने का अधिकार क्षेत्र नहीं है क्योंकि वह ‘‘अनधिकृत रूप से कब्जा करने वाले’’ नहीं हैं और इसलिए ‘कारण बताओ नोटिस’ को रद्द कर दिया जाना चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि ‘‘पिछले 83 वर्षों से इस संपत्ति पर याचिकाकर्ता का खुला और निरंतर कब्जा है। 14 अक्टूबर, 1960 से उसके इस कब्जे को अदालत के निषेधाज्ञा आदेश से संरक्षण प्राप्त है और वर्ष 2009 से 2026 तक उसके पक्ष में अदालती आदेश प्रभावी रहा है।’’
मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।
भाषा सुरभि पवनेश
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