दिल्ली: गुजरात के व्यक्ति से 1.5 लाख रुपये की ठगी के मामले में तीन लोग पकड़े गए

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दिल्ली: गुजरात के व्यक्ति से 1.5 लाख रुपये की ठगी के मामले में तीन लोग पकड़े गए

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  • Publish Date - September 12, 2026 / 04:10 PM IST,
    Updated On - September 12, 2026 / 04:10 PM IST

नयी दिल्ली, 12 सितंबर (भाषा) गुजरात के एक व्यक्ति से कम कीमत पर वॉशिंग मशीन के पुर्जे बेचने के नाम पर की गई ठगी की राशि वसूलने और ठिकाने लगाने में इस्तेमाल तीन खातों के धारकों को पकड़ा गया है, जिनमें दिल्ली विश्वविद्यालय का एक छात्र और एक बाइक टैक्सी चालक शामिल हैं। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि गुजरात के पाटन निवासी एक व्यक्ति से कथित तौर पर 1.5 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। पीड़ित ने वॉशिंग मशीन के पुर्जों के लिए ऑनलाइन भुगतान किया था, लेकिन उसे वादे के मुताबिक सामान नहीं मिला।

अधिकारियों ने बताया कि धोखाधड़ी से प्राप्त राशि कई खातों के जरिये प्राप्त की गई और उस राशि का कुछ हिस्सा पूर्वी दिल्ली के एक एटीएम से निकाला गया। पुलिस ने आरोपियों की पहचान दिल्ली के शकरपुर निवासी विकास सोनी (22), नैतिक (21) और त्रिलोकपुरी निवासी सागर (31) के तौर पर की।

पीड़ित से ऑनलाइन शिकायत मिलने के बाद, पुलिस ने सात सितंबर को औपचारिक रूप से प्राथमिकी दर्ज की।

पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान सामने आया कि धोखाधड़ी से हासिल की गई रकम का एक हिस्सा नैतिक के एक बैंक खाते में जमा किया गया था। उसने बताया कि जांच में पैसे के अंतरण में विकास की कथित भूमिका की जानकारी मिली और दोनों को पकड़ लिया गया। बाद में, पुलिस ने सागर को भी पकड़ लिया।

अधिकारियों ने बताया कि विकास बीए तृतीय वर्ष का छात्र है और कथित तौर पर उसने ठगी से प्राप्त राशि लेने के लिए अपने खाते के इस्तेमाल की अनुमति दी।

उन्होंने बताया कि नैतिक दिल्ली विश्वविद्यालय के मुक्त शिक्षा विद्यालय में बीए द्वितीय वर्ष का छात्र है और उसने ठगी के पैसे प्राप्त किए व निकाले।

पुलिस के मुताबिक, 12वीं कक्षा उत्तीर्ण और बाइक टैक्सी चालक सागर ने कथित तौर पर कमीशन पर अपने खाते का इस्तेमाल करने की अनुमति ठगों को दी और नकदी निकाली।

पुलिस ने विकास के पास से एक आईफोन 13 बरामद किया।

उन्होंने कहा कि इस उपकरण में कथित तौर पर लेन-देन से जुड़ी चैट और अन्य बातचीत मौजूद है तथा डिजिटल सबूत के लिए इसकी जांच की जा रही है।

भाषा धीरज नेत्रपाल

नेत्रपाल