सड़क हादसे में अपंग हुए व्यक्ति को दिल्ली न्यायाधिकरण ने 2.92 करोड़ रुपये मुआवजे का दिया आदेश

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सड़क हादसे में अपंग हुए व्यक्ति को दिल्ली न्यायाधिकरण ने 2.92 करोड़ रुपये मुआवजे का दिया आदेश

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  • Publish Date - August 16, 2026 / 05:37 PM IST,
    Updated On - August 16, 2026 / 05:37 PM IST

नयी दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) दिल्ली के मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने वर्ष 2020 में एक सड़क दुर्घटना में 88 प्रतिशत स्थायी रूप से अपंग हुए 32 वर्षीय एक व्यक्ति को 2.92 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी की यह दलील पूरी तरह खारिज कर दी कि पीड़ित ने हेलमेट नहीं पहना था इसलिए वह खुद भी लापरवाही का जिम्मेदार था। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि हेलमेट नहीं पहनने को सहभागी लापरवाही नहीं माना जा सकता।

न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में कहा, ‘यातायात नियम का उल्लंघन तब तक सहभागी लापरवाही नहीं माना जा सकता, जब तक कि इस बात का कोई सबूत न हो कि उस उल्लंघन की वजह से ही हादसा हुआ था।’

​​नीलमणि चौहान की याचिका पर सुनवाई पीठासीन अधिकारी अभिलाष मल्होत्रा कर रहे थे। रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट के कारण नीलमणि स्थायी रूप से 88 प्रतिशत अपंग हो गए हैं और अब वह जीवनभर बिना सहारे के खड़े होने या चलने में असमर्थ हैं।

चौहान की याचिका के अनुसार, 30 दिसंबर 2020 को लापरवाही से चलायी जा रही एक तेज गति कार ने उनके दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी थी, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

न्यायाधिकरण ने 12 अगस्त के अपने आदेश में कहा, ‘यह पहले ही रिकॉर्ड पर साबित हो चुका है कि पीड़ित के शरीर का निचला हिस्सा काम नहीं कर रहा है। वह पेशाब करने के लिए भी एक सहायक पर निर्भर हैं क्योंकि वह इसे महसूस नहीं कर सकता है और उसके नियोक्ता ने बयान दिया है कि वे मानवीय आधार पर उसे तब तक वेतन दे रहे हैं जब तक कि इस मामले का फैसला नहीं हो जाता।’

न्यायाधिकरण ने कहा कि चोटों की प्रकृति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि पीड़ित अब कभी भी विपणन कार्यकारी के तौर पर काम नहीं कर पाएंगे, क्योंकि इस काम में काफी भागदौड़ शामिल होती है। उसने कहा कि इसके अलावा, यदि वह कोई दफ्तर में बैठकर करने वाला काम भी करते हैं, तो उसके लिए भी उन्हें हर समय किसी देखभाल करने वाले सहायक की जरूरत होगी।

न्यायाधिकरण ने कार चालक रमेश को ‘लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने’ का दोषी पाया। अदालत ने बीमा कंपनी ‘इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड’ को भविष्य की कमाई के नुकसान, चिकित्सा उपचार और निजी सहायक के खर्च सहित विभिन्न मदों में ब्याज के साथ 2.92 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करने का निर्देश दिया।

न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी की इस दलील को खारिज कर दिया कि पीड़ित हेलमेट नहीं पहनने के कारण लापरवाह था।

न्यायाधिकरण ने कहा कि हेलमेट नहीं पहनना मोटर वाहन अधिनियम के तहत एक अपराध जरूर है, लेकिन इसे ऐसी लापरवाह कृत्य नहीं कहा जा सकता जिसकी वजह से दुर्घटना हुई हो। इसके साथ ही न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी के उस दावे को भी खारिज कर दिया जिसमें दुर्घटना को फर्जी बताया गया था।

भाषा सुमित अमित

अमित