(श्रुति भारद्वाज)
नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (एनजेडपी) को पशुओं की अदला-बदली योजना के तहत पटना चिड़ियाघर से एक बाघ मिलेगा और वह कई अन्य प्रजातियों के साथ एक सफेद बाघिन वहां भेजेगा। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
दिल्ली चिड़ियाघर के निदेशक संजीत कुमार (आईएफएस) ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि वन्य प्राणियों की अदला-बदली को प्रजनन आवश्यकताओं और चिड़ियाघर के भीतर प्रजातियों में विविधता लाने की आवश्यकता, दोनों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है।
उन्होंने कहा कि चिड़ियाघर को मार्च में पटना चिड़ियाघर से चार घड़ियाल, चार भूरे भेड़िये – दो नर और दो मादा – और दो बार्न उल्लू मिलेंगे। बदले में चिड़ियाघर जानवरों का एक समूह भेजेगा जिसमें संगाई हिरण (जिसे मणिपुर हिरण भी कहा जाता है), एक बाघिन, चित्रित सारस, सफेद पेलिकन और काले हिरण शामिल हैं।
इस आदान-प्रदान के पीछे के तर्क को समझाते हुए कुमार ने कहा कि चिड़ियाघर में वर्तमान में केवल एक मादा भेड़िया है, जो एक स्थायी प्रजनन कार्यक्रम की गुंजाइश को सीमित करती है। उन्होंने कहा, ‘‘इस आदान-प्रदान का मुख्य उद्देश्य एक स्वस्थ प्रजनन वातावरण विकसित करना तथा और अधिक प्रजातियां जोड़ना है।’’
कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में वर्तमान में 13 बाघ और शावक हैं। इनमें से सात रॉयल बंगाल टाइगर और छह सफेद बाघ हैं।
उन्होंने कहा कि मादा बाघों की संख्या अधिक है, जबकि अधिकांश नर बूढ़े हैं, क्योंकि वर्तमान में केवल चार नर बाघ हैं।
जलीय प्राणियों पर कुमार ने कहा कि चिड़ियाघर को चार घड़ियाल मिलेंगे, जिन्हें मौजूदा तीन घड़ियालों के साथ शामिल किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘आगंतुकों के लिए घड़ियाल की संख्या बढ़ाने के लिए हम अपने मौजूदा तीन के बेड़े में चार घड़ियाल लाएंगे।’’
निदेशक ने कहा कि अन्य चिड़ियाघरों के साथ आदान-प्रदान पर भी चर्चा की जा रही है।
कुमार ने कहा कि यदि जानवरों को समय-समय पर चिड़ियाघरों के बीच स्थानांतरित नहीं किया जाता है और असंबद्ध पशु के साथ प्रजनन की अनुमति नहीं दी जाती है, तो इससे समय के साथ अंतःप्रजनन हो सकता है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक अलगाव और उपयुक्त प्रजनन भागीदारों की कमी भी जानवरों की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है, जिससे उनमें अक्सर तनाव और हिंसक व्यवहार देखने को मिलता है।
कुमार ने बताया कि इसी तरह का आदान-प्रदान पिछले साल भी किया गया था, जब चिड़ियाघर को सूरत से ‘स्मूथ-कोटेड’ ऊदबिलाव और कछुए मिले थे। इससे पहले, उसने इसी कार्यक्रम के तहत असम से एक गैंडा और एक नर बाघ भी प्राप्त किया था।
भाषा गोला वैभव
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