Delimitation Bill in Parliament: मोदी सरकार ने नहीं मानी हार! एक बार फिर परिसीमन बिल लाने की तैयारी, मानसून सत्र के दौरान सदन में हो सकता है पेश

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Delimitation Bill in Parliament: मोदी सरकार ने नहीं मानी हार! एक बार फिर परिसीमन बिल लाने की तैयारी, मानसून सत्र के दौरान सदन में हो सकता है पेश
Modified Date: June 5, 2026 / 12:30 am IST
Published Date: June 4, 2026 8:08 pm IST

नई दिल्ली। Delimitation Bill in Parliament केंद्र की मोदी सरकार एक बार फिर डिलिमिटेशन (निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन) विधेयक को आगे बढ़ाने की तैयारी में जुट गई है। सूत्रों के अनुसार इस बार सरकार डिलिमिटेशन प्रस्ताव को ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ यानी देशभर में एक साथ चुनाव कराने की योजना के साथ जोड़कर संसद में पेश कर सकती है। इस दिशा में सरकार राजनीतिक दलों के बीच व्यापक सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार ने इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पहल को लेकर विभिन्न क्षेत्रीय दलों से संवाद शुरू कर दिया है। इसी क्रम में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) समेत कई दलों के नेताओं से चर्चा की जा रही है। सरकार का प्रयास है कि संसद में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत सुनिश्चित करने के बाद ही इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जाए।

सरकार की रणनीति क्या है?

Delimitation Bill in Parliament सरकार चाहती है कि बिल संसद में आने से पहले ज्यादा से ज्यादा दल उसके साथ हों। इससे बिल पास होने में आसानी होगी और विरोध भी कम होगा। इसीलिए मानसून सत्र शुरू होने से पहले और बैठकें और बातचीत होने की उम्मीद है। सबसे पहले सरकार बिल का नया ड्राफ्ट तैयार करेगी। फिर उसे सभी दलों को दिखाया जाएगा। अगर सहमति बनती है तो मानसून सत्र में यह बिल संसद में पेश हो सकता है। अगर सहमति नहीं बनी तो फिर से विवाद और विरोध की स्थिति बन सकती है। फिलहाल सबकी नजर इसी नए ड्राफ्ट पर है। बता दें कि अब तक कुल चार बार परिसीमन किया गया। पहली बार 1952, फिर 1962, फिर 1973 और आखिरी बार 2002 में हुई थी। तब से 543 पर ही सीटें फ्रीज हैं।

महिला आरक्षण बिल पर नहीं बनी थी सहमति

गौरतलब है कि इससे पहले लोकसभा में डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण से जुड़ा प्रस्ताव पर्याप्त समर्थन नहीं जुटा सका था। 529 सदस्यों में से 298 ने समर्थन किया, जबकि 230 ने विरोध किया। चूंकि ऐसे बिल को पारित कराने के लिए 352 वोट (दो-तिहाई बहुमत) जरूरी होते हैं, इसलिए सरकार इस बार पहले से समर्थन जुटाने में लगी हुई है। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को दो-तिहाई बहुमत न मिलने के बाद केंद्र सरकार ने अपनी रणनीति में बदलाव किया। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अनुरोध किया कि अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों- डिलिमिटेशन बिल 2026 और यूनियन टेरिटरीज लॉ (अमेंडमेंट) बिल, 2026 को फिलहाल आगे न बढ़ाया जाए। दरअसल, सरकार ने 16 से 18 अप्रैल के बीच तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया था, जिसका मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण बिल को पारित कराना था। इस बिल में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था। हालांकि, अपेक्षित समर्थन न मिलने के कारण यह बिल पास नहीं हो सका। इसी परिप्रेक्ष्य में सरकार ने अन्य संवेदनशील और बड़े राजनीतिक असर वाले विधेयकों को रोकना बेहतर समझा, ताकि पहले व्यापक सहमति बनाई जा सके और भविष्य में इन बिलों को अधिक समर्थन के साथ पेश किया जा सके।


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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।