DGP Ramachandra Rao Video Original: महिला के साथ केबिन में रोमांस करते आईपीएस अफसर का वीडियो वायरल, DGP रैंक के हैं अधिकारी, प्रदेश के सीएम तक पहुंचा मामला

DGP Ramachandra Rao Video Original: महिला के साथ केबिन में रोमांस करते आईपीएस अफसर का वीडियो वायरल, डीजीपी रैंक के हैं अधिकारी, प्रदेश के सीएम तक पहुंचा मामला

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  • Publish Date - January 19, 2026 / 04:49 PM IST,
    Updated On - January 19, 2026 / 04:49 PM IST

DGP Ramachandra Rao Video Original: महिला के साथ केबिन में रोमांस करते आईपीएस अफसर का वीडियो वायरल, DGP रैंक के हैं अधिकारी Image: X

HIGHLIGHTS
  • डॉ. रामचंद्र राव वर्दी एक महिला के साथ रोमांटिक स्थिति में नजर आ रहे
  • मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मामले को गंभीरता से लिया
  • डॉ. रामचंद्र राव ने इन वीडियो को 'फर्जी' और 'छेड़छाड़' किया हुआ बताया

बेंगलुरु: DGP Ramachandra Rao Video Original प्रदेश के आईपीएस डॉ. रामचंद्र राव का एक वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासनिक महकमें में हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो में पुलिस अधिकारी अपने केबिन में महिला के साथ रोमांस करते हुए नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये वीडियो ​हिडन कैमरे से रिकॉर्ड किया गया है। फिलहाल मामला गरमाने के बाद खुद प्रदेश के सीएम ने विभाग से विस्तृत ब्रीफिंग ली है। बता दें कि डॉ. रामचंद्र राव डीजीपी रैंक के अधिकारी हैं।

महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में नजर आए डॉ. रामचंद्र राव

DGP Ramachandra Rao Video Original मिली जानकारी के अनुसार सामने आए वीडियो में डॉ. रामचंद्र राव वर्दी में अपने केबिन में एक महिला के साथ बैठे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने पहले महिला को गले लगाया और उन्हें किस करते हुए नजर आए। बताया गया कि महिलाएं अलग-अलग मौकों पर अधिकारी के दफ्तर पहुंचती थीं और हर बार उनके कपड़े अलग थे। वहीं, इस वीडियो को लेकर डॉ. रामचंद्र राव फिलहाल तो फर्जी करारा दिया है, लेकिन मामले की जांच के बाद ही असली बात सामने आएगी।

सीएम सिद्धारमैया ने लिया मामले में संज्ञान

वहीं, दूसरी ओर वायरल वीडियो को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विभाग से विस्तृत ब्रीफिंग ली है। वीडियो देखने के बाद मुख्यमंत्री बेहद गुस्से में हैं। सरकार अब वीडियो की असलियत और अनुशासनहीनता के आरोपों की जांच कर रही है। हालांकि, महिलाओं के साथ किसी जबरदस्ती का आरोप नहीं है, लेकिन ड्यूटी के घंटों के दौरान सरकारी चैंबर के अंदर ऐसा आचरण सीनियर पुलिस अधिकारी की गरिमा के खिलाफ माना जा रहा है।

 

वीडियो के साथ छेड़छाड़ किया गया: डीजीपी रामचंद्र राव

डीजीपी रामचंद्र राव ने एक नामी मीडिया संस्थान से बात करते हुए कहा कि उन्हें बदनाम करने के लिए वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग उन्हें जानबूझकर परेशान करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान वीडियो की सत्यता की जांच करने पर टिका है। सार्वजनिक रूप से इस घटना की तीखी आलोचना हो रही है क्योंकि इससे पुलिस बल की नैतिक साख को गहरा धक्का लगा है।

राष्ट्रपति पुलिस पदक से हैं सम्मानित

बता दें कि डॉ. रामचंद्र राव और उनका परिवार पहले भी विवादों में रहा है। बीते दिनों गोल्ड स्मगलिंग मामले में भी उनका नाम जुड़ चुका है और इस मामले में उनके पिता मुख्य आरोपी हैं। फिलहाल ये मामला ना सिर्फ प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक हल्कों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले डॉ. रामचंद्र राव 1999 बैच के IPS अधिकारी हैं और वर्तमान में डिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (ADGP) के पद पर तैनात हैं। पुलिस प्रशासन में आने से पहले राम चंद्रराव एक डॉक्टर थे, लेकिन उन्होंने डॉक्टरी छोड़कर प्रशासनिक सेवा में आना उचित समझा। ज्ञात हो कि रामचंद्र राव को राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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डॉ. रामचंद्र राव की वर्तमान स्थिति क्या है?

वे 1999 बैच के IPS अधिकारी हैं और वर्तमान में एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (ADGP) के पद पर तैनात हैं। वे मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं।

वीडियो को लेकर अधिकारी का क्या दावा है?

अधिकारी का कहना है कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है और यह उन्हें बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश है।

क्या उन पर कोई आपराधिक मामला दर्ज हुआ है?

फिलहाल सरकार वीडियो की सत्यता (Forensic Lab) की जांच कर रही है। आधिकारिक तौर पर अभी किसी आपराधिक केस की जानकारी नहीं है, लेकिन विभागीय जांच (Departmental Inquiry) शुरू कर दी गई है।

क्या यह वीडियो एक ही दिन का है?

नहीं, रिपोर्ट्स के अनुसार वीडियो में महिलाएं अलग-अलग मौकों पर अलग-अलग कपड़ों में नजर आ रही हैं, जिससे पता चलता है कि यह लंबे समय तक चली गतिविधियों का हिस्सा है।

क्या उन्हें मिले सम्मान वापस लिए जा सकते हैं?

डॉ. रामचंद्र राव को राष्ट्रपति पुलिस पदक मिल चुका है। यदि विभागीय जांच में उन पर लगे आरोप 'गंभीर कदाचार' (Serious Misconduct) की श्रेणी में साबित होते हैं, तो सरकार सम्मान वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।