सर्जरी के लिए आम्रपाली समूह के पूर्व सीएमडी को एम्स बोर्ड के समक्ष पेश करने का निर्देश

सर्जरी के लिए आम्रपाली समूह के पूर्व सीएमडी को एम्स बोर्ड के समक्ष पेश करने का निर्देश

सर्जरी के लिए आम्रपाली समूह के पूर्व सीएमडी को एम्स बोर्ड के समक्ष पेश करने का निर्देश
Modified Date: November 29, 2022 / 08:24 pm IST
Published Date: June 6, 2022 6:49 pm IST

नयी दिल्ली, छह जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को आम्रपाली समूह के पूर्व अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अनिल कुमार शर्मा को “बाइलेटरल इंगूइनल हर्निया” की सर्जरी की जांच के लिए एम्स के मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया।

न्यायालय के निर्देश के अनुपालन में स्थापित एम्स मेडिकल बोर्ड ने यहां मंडोली जेल में बंद शर्मा की 21 मार्च को जांच की थी और सर्जरी की सिफारिश की थी।

न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की अवकाशकालीन पीठ से शर्मा की ओर से पेश अधिवक्ता मनोज सिंह ने कहा कि चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उनका ऑपरेशन किया जाना है, इसके लिए उन्हें जांच और सर्जरी की तारीख के लिए डॉक्टरों के समक्ष पेश किया जाना चाहिए।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि अदालत ने एक चिकित्सा बोर्ड का गठन किया है और उन्हें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उसके समक्ष पेश किया जा सकता है।

पीठ ने अभिलेखों को देखने के बाद निर्देश दिया कि शर्मा को मंगलवार को मेडिकल बोर्ड के समक्ष जांच के लिए पेश किया जाए और उसके बाद सलाह के अनुसार उनका जल्द से जल्द ऑपरेशन किया जाए।

पीठ ने इस मामले को अगली सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार को सूचीबद्ध किया।

इससे पहले 21 मार्च को उच्चतम न्यायालय ने आम्रपाली समूह के निदेशकों एवं अन्य अधिकारियों के खिलाफ घर खरीदारों द्वारा दर्ज कराए गए 80 से अधिक आपराधिक मुकदमों की सुनवाई एक ही अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश देने से इंकार कर दिया।

न्यायालय ने कहा कि हर शिकायतकर्ता के अपने अलग-अलग बयान होंगे और ये अदालत के लिए समस्या खड़ी कर देगा। ऐसे में संबंधित न्यायाधीश की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।

रियल एस्टेट कंपनी की जेल में बंद एक अधिकारी शिव प्रिया की ओर से दलील पेश करते हुए उनके अधिवक्ता ने अनुरोध किया कि कोयला घोटाला की तरह इस मामले में भी 85 आपराधिक मामलों की सुनवाई को सात अलग-अलग अदालतों से राष्ट्रीय राजधानी की किसी एक अदालत में स्थानांतरित किया जा सकता है। न्यायालय ने इस पर भी सहमति नहीं जताई थी।

भाषा

प्रशांत नरेश

नरेश


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