चिकित्सीय प्रतिष्ठानों के लिए निर्देश: केरल सरकार को हलफनामे के लिए एक सप्ताह का समय मिला

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चिकित्सीय प्रतिष्ठानों के लिए निर्देश: केरल सरकार को हलफनामे के लिए एक सप्ताह का समय मिला

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  • Publish Date - February 24, 2026 / 06:35 PM IST,
    Updated On - February 24, 2026 / 06:35 PM IST

नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केरल सरकार को राज्य उच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए कई दिशानिर्देशों को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय प्रदान कर दिया। इन दिशानिर्देशों में चिकित्सीय प्रतिष्ठानों से दी जाने वाली सेवाओं और पैकेज दरों की सूची को प्रमुखता से प्रदर्शित करने के लिए कहना भी शामिल है।

न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वकील द्वारा हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगे जाने के बाद यह आदेश पारित किया।

केरल सरकार को समय देते हुए, पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता – केरल प्राइवेट हॉस्पिटल्स एसोसिएशन और हुसैन कोया थंगल नामक व्यक्ति – इसके बाद दो सप्ताह के भीतर अपना प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल कर सकते हैं।

शीर्ष अदालत ने कहा कि पिछले साल 16 दिसंबर को जारी उसका अंतरिम आदेश 24 मार्च को अगली सुनवाई की तारीख तक लागू रहेगा। इस आदेश में अधिकारियों को एसोसिएशन के सदस्यों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न करने का निर्देश दिया गया था।

पिछले साल दिसंबर में, उच्चतम न्यायालय ने केरल उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी और इस संबंध में राज्य सरकार तथा अन्य को नोटिस जारी किया था।

उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने 26 नवंबर, 2025 को फैसला सुनाते हुए केरल चिकित्सीय प्रतिष्ठान (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2018 के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करने वाले अपने एकल-न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ अपील को खारिज कर दिया था।

एकल न्यायाधीश के 23 जून के आदेश को बरकरार रखते हुए, उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अधिनियम के उद्देश्यों और प्रस्तावना की भावना के अनुरूप, अधिनियम का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे।

उच्च न्यायालय ने कई दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा था कि प्रत्येक चिकित्सीय प्रतिष्ठान को रिसेप्शन या प्रवेश डेस्क पर और अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर मलयालम तथा अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रमुखता से दी जाने वाली सेवाओं की सूची और आमतौर पर की जाने वाली प्रक्रियाओं के लिए पैकेज दर प्रदर्शित करनी होंगी, साथ ही अप्रत्याशित जटिलताओं या अतिरिक्त प्रक्रियाओं का विवरण दिया जाना चाहिए।

अन्य दिशा-निर्देशों के अलावा, इसने कहा था कि प्रत्येक चिकित्सीय प्रतिष्ठान को एक शिकायत डेस्क या हेल्पलाइन बनाए रखनी होगी और प्रत्येक शिकायत को एक अद्वितीय संदर्भ संख्या के साथ पंजीकृत करना होगा, तथा टेक्स्ट संदेशों, व्हाट्सऐप या भौतिक रूप में तुरंत एक पावती जारी करनी होगी।

उच्च न्यायालय ने कहा था, ‘‘प्रदर्शित सभी दर सूचियाँ, ब्रोशर और वेबसाइट की जानकारी अद्यतन रखी जाएगी। सेवाओं, दरों या शिकायत संपर्क विवरणों में कोई भी परिवर्तन होने पर उसे तुरंत अद्यतन किया जाएगा तथा संशोधन की तिथि स्पष्ट रूप से अंकित की जाएगी।’’

इसने कहा था कि इन दिशानिर्देशों का पालन न करने पर अधिनियम के तहत नियामक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें पंजीकरण का निलंबन या रद्द करना और जुर्माना लगाना शामिल है, साथ ही मरीजों को उपलब्ध किसी भी नागरिक, आपराधिक या संवैधानिक उपचार का भी उपयोग किया जा सकेगा।

उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने केरल चिकित्सीय प्रतिष्ठान (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2018 और केरल चिकित्सीय प्रतिष्ठान (पंजीकरण और विनियमन) नियम, 2018 के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था।

दायर की गई याचिका में अधिनियम के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी गई थी, जिसमें प्रत्येक उपचार मद और ‘‘पैकेज’’ के लिए ली जाने वाली फीस की सूची प्रकाशित करने का दायित्व भी शामिल था।

भाषा नेत्रपाल माधव

माधव