नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण के बीच प्लाज्म थेरेपी की चर्चा भी जोरों पर है। दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया के मुताबिक 6-10 मरीज़ों की दो छोटी स्टडी हुई हैं जिसमें ये पता चला है कि ये कोरोना वायरस में ये उपयोगी हो सकती है। गुलेरिया के मुताबिक प्लाज्मा थेरेपी 100 सालों से ज़्यादा समय से मौजूद है। सबसे पहले इसका इस्तेमाल 1918 की महामारी में हुआ था।
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प्लाज्मा थेरेपी 100 सालों से ज़्यादा समय से मौजूद है। सबसे पहले इसका इस्तेमाल 1918 की महामारी में हुआ था। 6-10मरीज़ों की दो छोटी स्टडी हुई हैं जिसमें ये पता चला है कि ये कोरोना वायरस में ये उपयोगी हो सकती है: डॉ. रणदीप गुलेरिया, AIIMS के निदेशक, दिल्ली pic.twitter.com/vyaF8UmGu0
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 24, 2020
उनके मुताबिक प्लाज्मा थेरेपी उपचार का एकमात्र तरीका नहीं है। ऐसा नहीं है कि ये सभी मरीज़ों में कारगर होगी ही। जो खून ठीक हुए मरीज़ दे रहे हैं उसमें अच्छी मात्रा में एंटीबाडीज होनी चाहिए। हमें इसे एक मैजिक बुलेट की तरह नहीं लेना चाहिए।
प्लाज्मा थेरेपी उपचार का एकमात्र तरीका नहीं है। ऐसा नहीं है कि ये सभी मरीज़ों में कारगर होगी ही। जो खून ठीक हुए मरीज़ दे रहे हैं उसमें अच्छी मात्रा में एंटीबाडीज होनी चाहिए। हमें इसे एक मैजिक बुलेट की तरह नहीं लेना चाहिए: डॉ. रणदीप गुलेरिया, AIIMS के निदेशक, दिल्ली
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दिल्ली में प्लाज्मा थेरेपी का ट्रायल किया गया। ट्रायल के शुरुआती नतीजे सकारात्मक आए हैं। अब माना जा रहा है कि दिल्ली में प्लाज्मा थेरेपी के जरिए कोरोना संक्रमितों का इलाज शुरू किया जा सकता है। इसका औपचारिक ऐलान अरविंद केजरीवाल कर सकते हैं।
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दिल्ली में कोरोना संक्रमित मरीजों की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। अब तक 2 हजार से ज्यादा पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं, जिसमें 50 लोगों की मौत हो चुकी है. कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए 90 से ज्यादा इलाके हॉटस्पॉट घोषित किए जा चुके हैं. अब सरकार प्लाज्मा थेरेपी के जरिए कोरोना को रोकने का प्लान बना रही है।
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क्या है प्लाज्मा थेरेपी
KGMU के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर डी हिमांशु ने बताया कि इस थेरेपी का इस्तेमाल कोरोना संक्रमित उन मरीजों पर किया जाएगा, जिनकी हालत गंभीर है। मालूम हो कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी प्लाज्मा थेरेपी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया था।
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प्लाज्मा थेरेपी में कोरोना संक्रमण से मुक्त हो चुके व्यक्तियों के खून से प्लाज्मा निकालकर दूसरे कोरोना वायरस संक्रमित रोगी को चढ़ाया जाएगा। KGMU के डॉक्टर्स को अपने यहां से ठीक हो चुके कोरोना संक्रमित मरीजों के 28 दिन पूरे होने का इंतज़ार है। वहीं, दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से प्रदेश के अन्य कोरोना मरीज, जो ठीक हो चुके हैं, उनकी सूची भी जुटाई जा रही है।
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डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि प्लाज्मा थेरेपी में कोरोना संक्रमित मरीज के ठीक हो जाने के कम से कम 28 दिन बाद उसके खून से प्लाज्मा निकाला जाता है। इससे सही हो चुके रोगी के एंटीबॉडी तत्व दूसरे रोगी के शरीर में जाते हैं। ऐसा करने से संक्रमित व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से बढ़ती है। इससे उसका कोरोना संक्रमण जल्द ठीक होने की संभावना बढ़ती है।
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वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि इससे पहले दिल्ली में इस थेरेपी का इस्तेमाल हुआ है। नई दिल्ली में जिस संक्रमित मरीज में इस थेरेपी से प्लाज्मा चढ़ाया गया, उसकी हालात में सुधार दिख रहा है। कोरोना के इस संकट काल में इस प्रयोग के सफल होने से काफी राहत होगी।