तमिलनाडु के अधिकारों पर चुप रहने वाले ‘गद्दार’ हैं: द्रमुक नेता दयानिधि मारन

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तमिलनाडु के अधिकारों पर चुप रहने वाले ‘गद्दार’ हैं: द्रमुक नेता दयानिधि मारन

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  • Publish Date - August 3, 2026 / 01:15 PM IST,
    Updated On - August 3, 2026 / 01:15 PM IST

चेन्नई, तीन अगस्त (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सांसद दयानिधि मारन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर परोक्ष रूप से हमला करते हुए कहा कि मेकेदातु बांध परियोजना मुद्दा और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) समाप्त करने समेत तमिलनाडु के वैध अधिकारों पर चुप रहने वाले लोग ‘‘गद्दार’’ हैं।

मारन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘जो लोग नीट परीक्षा प्रणाली को समाप्त करने पर जोर नहीं देते, बल्कि केवल परीक्षा में अनियमितताओं की बात करते हैं, वे गद्दार हैं!’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘जो लोग मेकेदातु बांध का विरोध नहीं करते, जो कावेरी नदी के मुद्दे पर तमिलनाडु के वैध अधिकारों की आवाज नहीं उठाते, वे गद्दार हैं!’’

द्रमुक के वरिष्ठ नेता ने रविवार को कहा, ‘‘जो लोग केवल परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को उठाते हैं, लेकिन नीट परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह समाप्त करने की मांग नहीं करते, वे गद्दार हैं!’’

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘जो लोग भाजपा की कथित जोड़-तोड़ की राजनीति की निंदा करते हैं, लेकिन जानबूझकर टीवीके (तमिलगा वेत्री कषगम) की जोड़-तोड़ की घिनौनी राजनीति पर चुप्पी साध लेते हैं, वे केवल विश्वासघात की अपनी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘नीट का विरोध कर रहे छात्रों पर बर्बरतापूर्ण कार्रवाई करने वाली दिल्ली पुलिस की तरह तमिलनाडु पुलिस की निंदा न करना विश्वासघात की पराकाष्ठा है।’’

द्रमुक के लोकसभा सदस्य ने कहा, ‘‘जब मैंने तमिलनाडु आकर राजनीति का पाठ पढ़ाने वाले एक व्यक्ति के बारे में पढ़ा, तो ये सारी बातें एक-एक कर मेरे मन में आईं! इतने सारे विश्वासघात!’’

राहुल गांधी ने एक अगस्त को यहां निकटवर्ती मामल्लपुरम में संवाददाताओं से कहा था कि हर राष्ट्रीय और तमिल दल को संसद में परिसीमन विधेयक पारित कराने की केंद्र की कोशिश को विफल करना चाहिए और इस विधेयक का समर्थन करना जनता के साथ विश्वासघात होगा।

उन्होंने दावा किया था कि परिसीमन विधेयक पारित कराने के भाजपा के प्रयास का समर्थन करने वाला कोई भी राजनीतिक दल या व्यक्ति तमिलनाडु की जनता के साथ विश्वासघात कर रहा है और इतिहास उन्हें ‘‘21वीं सदी का एट्टप्पन’’ के रूप में याद रखेगा।

राहुल गांधी ने बीते शनिवार को कहा था कि 18वीं सदी के तमिल शासक एट्टप्पन का नाम विश्वासघात का पर्याय बन गया, क्योंकि माना जाता है कि उन्होंने अंग्रेजों को महान स्वतंत्रता सेनानी वीरपांडया कोट्टाबोमन को पकड़ने और उनकी हत्या करने में मदद की थी।

भाषा खारी सुभाष

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