(जीवन प्रकाश शर्मा)
नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) द्रमुक सांसद वी एस मथेश्वरन ने शुक्रवार को दावा किया कि रेल मंत्रालय ने पिछले 12 साल में ‘पैलेस ऑन व्हील्स’, ‘महाराजा एक्सप्रेस’ और ‘डेक्कन ओडिसी’ जैसी लग्जरी ट्रेनों में 336 रेलवे अधिकारियों की यात्रा पर जनता के करोड़ों रुपये बर्बाद किए हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंत्रालय ने इस सवाल पर संसद को गुमराह किया कि क्या रेलवे अधिकारियों को भारतीय रेलवे सेवक (पास) नियम, 1986 के तहत लग्जरी ट्रेनों में यात्रा करने की अनुमति है।
मथेश्वरन ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘2022 में, मंत्रालय ने लोकसभा को बताया था कि रेलवे अधिकारी अपने परिवारों के साथ लग्जरी ट्रेनों में यात्रा कर सकते हैं। लेकिन अब, 29 जुलाई, 2026 को मेरे सवाल के जवाब में कहा गया कि वे ऐसी यात्रा नहीं कर सकते। इतना ही नहीं, जब मैंने मंत्रालय से ऐसे सभी अधिकारियों के नाम और पद बताने को कहा, तो उन्होंने सिर्फ एक संख्या (336) बताई, उन अधिकारियों के नाम नहीं।’’
‘पैलेस ऑन व्हील्स’, ‘महाराजा एक्सप्रेस’ और ‘डेक्कन ओडिसी’ लग्जरी ट्रेनें हैं जिन्हें इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) चलाता है। यात्रा के कार्यक्रम के आधार पर इनका किराया प्रति व्यक्ति 4.5 लाख रुपये से लेकर 26 लाख रुपये तक है।
मथेश्वरन ने संसद में यह मुद्दा कई बार उठाया है। हाल ही में, 29 जुलाई को उन्होंने रेल मंत्रालय से भारतीय रेलवे सेवक (पास) नियम, 1986 के उस खास प्रावधान की जानकारी मांगी, जिसके तहत रेलवे अधिकारियों को आधिकारिक ड्यूटी के दौरान अपने परिवारों के साथ लग्जरी ट्रेनों में यात्रा करने की अनुमति है।
मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा, ‘‘रेलवे सेवक (पास) नियम, 1986 के अनुसार, रेलवे अधिकारियों को भारतीय रेलवे की ट्रेनों – जिनमें राजधानी, दुरंतो, शताब्दी, हमसफर, गतिमान और वंदे भारत ट्रेनें शामिल हैं – में परिवार के साथ यात्रा करने की अनुमति है।’’
मंत्रालय ने कहा, ‘‘इसके अलावा, राज्य पर्यटन विकास निगमों और आईआरसीटीसी द्वारा संचालित लग्जरी/पर्यटक ट्रेनों के संबंध में रेल सेवाक (पास) नियम, 1986 में कोई बदलाव नहीं किया गया है।’’
मथेश्वरन ने इन लग्जरी ट्रेनों में यात्रा करने वाले अधिकारियों के बारे में जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में मंत्रालय ने 22 जुलाई, 2026 को बताया कि पिछले 12 साल में कुल 336 रेलवे अधिकारियों ने अपने ट्रैवल पास का इस्तेमाल करके इंडियन रेलवे की लग्जरी ट्रेनों में यात्रा की है।
मथेश्वरन ने कहा कि मंत्रालय का 29 जुलाई का जवाब, 27 जुलाई, 2022 को लोकसभा में दिए गए उसके जवाब से अलग है। उस समय मंत्रालय ने कहा था कि अधिकारियों को सरकारी काम के सिलसिले में परिवार के सदस्यों के साथ इन टूरिस्ट ट्रेनों में यात्रा करने की इजाज़त है।
उन्होंने कहा, ‘‘इन दोनों जवाबों से साफ़ है कि मंत्रालय ने न सिर्फ़ 2022 में सदन को गुमराह किया, बल्कि 336 रेलवे अधिकारियों और उनके परिवारों ने जनता के पैसे से यात्राएं कीं।’’
भाषा अविनाश नरेश
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