क्या केंद्र वैवाहिक बलात्कार पर 2017 का अपना हलफनामा वापस लेना चाहता है : दिल्ली उच्च न्यायालय

क्या केंद्र वैवाहिक बलात्कार पर 2017 का अपना हलफनामा वापस लेना चाहता है : दिल्ली उच्च न्यायालय

क्या केंद्र वैवाहिक बलात्कार पर 2017 का अपना हलफनामा वापस लेना चाहता है : दिल्ली उच्च न्यायालय
Modified Date: November 29, 2022 / 08:56 pm IST
Published Date: January 28, 2022 8:56 pm IST

नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र से यह बताने को कहा कि क्या वह 2017 के अपने उस हलफनामे को वापस लेना चाहता है, जिसमें उसने दलील दी थी कि वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता क्योंकि यह विवाह रूपी संस्था को अस्थिर कर सकता है और पति को प्रताड़ित करने के लिए एक आसान हथकंडा बन सकता है।

न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल चेतन शर्मा को इस पहलू पर निर्देश प्राप्त करने को कहा और विषय को 31 जनवरी के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

पीठ, वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में रखने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रही है।

अदालत का यह निर्देश याचिकाकर्ता एनजीओ (गैर सरकारी संस्था) आरआईटी फाउंडेशन और ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वुमंस एसोसिएशन का प्रतिनिधित्व कर रही वकील करूणा नंदी द्वारा यह स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा कि क्या वह केंद्र द्वारा दी अब तक दी गई लिखित दलीलों और दाखिल हलफनामों पर दलील पेश कर सकती हैं।

इस पर न्यायमूर्ति शकधर ने कहा, ‘‘श्रीमान शर्मा उस पर भी निर्देश प्राप्त करें। ’’

भाषा

सुभाष माधव

माधव


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