कोलकाता, 12 मई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मंगलवार को अपनी पार्टी की हालिया चुनावी हार पर चिंतनशील, लेकिन जुझारू साहित्यिक प्रतिक्रिया देते हुए “बहादुर” शीर्षक वाली एक कविता साझा की, जिसमें कार्यकर्ताओं से विपरीत परिस्थितियों में साहस, गरिमा और आंतरिक शक्ति बनाए रखने का आह्वान किया गया है।
ममता ने कविता की शुरुआत “हिम्मत न हारें, मजबूत बने रहें” पंक्ति से की।
उन्होंने लिखा, “अगर आप हमेशा आत्मविश्वास से भरे रहते हैं, तो कोई आपको छू नहीं सकता।”
“मुस्कान के साथ क्रूर लोगों का सामना करने” का संदेश देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “आपकी मुस्कान ही आपकी मानसिक ताकत है।”
कविता में बार-बार दृढ़ता, अकेलेपन और नैतिक विश्वास जैसे विषयों का जिक्र किया गया है।
ममता ने लिखा, “जब तुम पैदा हुए थे, तब अकेले आए थे और जब तुम्हारी मृत्यु होगी, तब भी अकेले ही जाना होगा। तुम्हारे अच्छे कर्म हमेशा याद किए जाएंगे।”
कविता की अंतिम पंक्ति में तृणमूल सुप्रीमो ने लिखा है, “हिम्मत न हारें। आखिरकार आपको लाभ मिलेगा, यह विश्वास रखें।”
भाषा पारुल माधव
माधव