कोलकाता, 13 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल में नगरपालिका भर्ती में कथित ‘‘अनियमितताओं’’ से जुड़े धन शोधन की जांच के तहत तृणमूल कांग्रेस के नेता एवं विधायक मदन मित्रा से जुड़े कई परिसरों पर शनिवार सुबह से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी जारी है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती राज्य सरकार में मंत्री रहे मित्रा से जुड़े कुल सात परिसरों पर छापेमारी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि दक्षिण कोलकाता में मित्रा के भवानीपुर स्थित आवास, कोलकाता के उत्तरी इलाके में दक्षिणेश्वर में पांच मंजिला अपार्टमेंट और कोलकाता के दक्षिणी बाहरी इलाके में जोका स्थित एक फ्लैट में छापेमारी शुरू की गई।
अधिकारियों ने बताया कि उत्तरी कोलकाता के बेलेघाटा में एक संपत्ति और भवानीपुर व संतोषपुर में दो स्थानीय क्लब परिसरों में भी छापेमारी की जा रही है।
जांच अधिकारियों ने भवानीपुर में धीरेंद्रनाथ गुप्ता रोड स्थित नेता के घर पर उनसे पूछताछ भी की, जहां वह कथित तौर पर अपने परिवार के साथ रहते थे।
मित्रा पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले की कमरहटी विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।
ईडी अधिकारियों ने कहा कि मित्रा पर कमरहटी और पास के टीटागढ़ जैसे नगर निकायों समेत अलग-अलग नगरपालिकाओं में कई पदों पर अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के मामले में बिचौलियों के जरिए रिश्वत के रूप में नकद और सोना लेने का आरोप है।
उन्होंने दावा किया कि मित्रा ऐसी 125 अवैध नियुक्तियों से ‘‘जुड़े’’ हुए हैं।
उन्होंने बताया कि ईडी के अधिकारी इस मामले से जुड़े वित्तीय लेन देन वाले कागजी दस्तावेजों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि छापेमारी की मौजूदा कार्रवाई कारोबारी अयान सिल से मिली जानकारी पर आधारित है। सिल को इसी मामले में 20 मार्च, 2023 को गिरफ्तार किया गया था।
आरोप है कि सिल अपनी कंपनी ‘एबीएस इन्फोजोन प्राइवेट लिमिटेड’ के जरिए कई नगरपालिकाओं में भर्ती प्रक्रियाएं आयोजित करने में शामिल थे। ईडी ने कंपनी पर सरकारी स्कूलों में भर्ती के लिए ओएमआर शीट तैयार करने, परीक्षाएं आयोजित करने और साक्षात्कार की प्रक्रिया के प्रबंधन में गड़बड़ी का आरोप लगाया है।
स्कूल भर्ती घोटाले की जांच के दौरान जांच अधिकारियों को सिल से जुड़ी संपत्ति पर ऐसे सबूत मिले, जिनसे पता चला कि पश्चिम बंगाल की कम से कम सात नगरपालिकाओं में ग्रुप-डी स्टाफ, टाइपिस्ट और अन्य कनिष्ठ स्तर के कर्मचारियों की भर्ती में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ था।
अधिकारियों का मानना है कि नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ी मात्रा में धन का लेन-देन हुआ और प्रभावित नगर निकायों में कमरहटी नगरपालिका भी शामिल थी।
अप्रैल 2023 में कलकत्ता उच्च न्यायालय को सौंपी गई एक रिपोर्ट में ईडी ने बताया था कि सिल ने समूचे बंगाल की नगरपालिकाओं में नौकरी दिलाने का वादा करके नौकरी पाने के इच्छुक उम्मीदवारों से 200 करोड़ रुपये से अधिक की रकम हासिल की थी, जिसमें से एजेंसी ने 111 करोड़ रुपये जब्त कर लिए हैं।
एजेंसी ने कमरहटी, टीटागढ़, कांचरापाड़ा, न्यू बैरकपुर, टाकी, हलीशहर, बड़ानगर, दक्षिण और उत्तर दमदम नगरपालिकाओं का ज़िक्र किया था, जहां कथित तौर पर ऐसी अनियमित भर्तियां हुई थीं।
एजेंसी ने 2024 में इस मामले से जुड़ा आरोपपत्र भी दाखिल किया।
ईडी ने 11 मई को तृणमूल कांग्रेस नेता और ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में पूर्व मंत्री सुजीत बोस को दक्षिण दमदम नगरपालिका में लगभग 150 अवैध भर्तियों के आरोप में गिरफ्तार किया, जहां वह उपाध्यक्ष के तौर पर सेवा दे चुके थे।
भाषा सुरभि दिलीप
दिलीप