ईडी ने लुधियाना के उद्योगपति के ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में संपत्ति जब्त की

Ads

ईडी ने लुधियाना के उद्योगपति के ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में संपत्ति जब्त की

  •  
  • Publish Date - February 17, 2026 / 07:06 PM IST,
    Updated On - February 17, 2026 / 07:06 PM IST

नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को कहा कि उसने लुधियाना के प्रसिद्ध उद्योगपति एस पी ओसवाल के ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़ी धन शोधन जांच के तहत एक ‘म्यूल’ बैंक खाते में जमा 1.76 करोड़ रुपये की धनराशि जब्त कर ली है।

ईडी के बयान में कहा गया कि यह धनराशि मृत्युंजय मल्टीट्रेड नामक एक इकाई के बैंक खाते में पड़ी थी और इस बैंक खाते का इस्तेमाल ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे विभिन्न साइबर अपराधों से अर्जित अपराध की आय को प्राप्त करने और उसे स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था।

पंजाब के लुधियाना में पुलिस ने इस धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था, जिसका संज्ञान ईडी ने लिया।

एजेंसियों के अनुसार, वर्धमान ग्रुप के अध्यक्ष ओसवाल को अगस्त 2023 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारी बनकर धोखाधड़ी करने वालों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया था और उनसे सात करोड़ रुपये की उगाही की थी।

जांच में पता चला कि साइबर अपराध से प्राप्त धन को कई बैंक खातों में भेजा गया और ये खाते ‘‘आर्थिक रूप से कमजोर’’ व्यक्तियों को ऋण की व्यवस्था करने या रोजगार प्रदान करने के झूठे वादे करके खोले गए थे।

ईडी ने इस मामले में 2025 में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

‘म्यूल’ खातों का इस्तेमाल वित्तीय अपराधों से अर्जित धन को स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है और इसका असली मालिक इसका उपयोगकर्ता नहीं होता है। ऐसे खाते फर्जी या किराए पर लिए गए केवाईसी (केवाईसी) का उपयोग करके बनाए जाते हैं, जहां कोई व्यक्ति निश्चित कमीशन के बदले अपना खाता उधार देता है।

‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर अपराध का एक तरीका है, जिसमें अपराधी पुलिस या जांच एजेंसी के अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं। वे धमकी देते हैं कि अगर पैसे नहीं दिए, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा या मुकदमा चलाया जाएगा, और इसी डर के सहारे उनसे पैसे वसूलते हैं।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप