कोट्टायम (केरल), 28 फरवरी (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि शिक्षा चरित्र का निर्माण करती है और एक शिक्षित नागरिक राष्ट्र के भविष्य को आकार देता है।
राधाकृष्णन ने चांगनास्सेरी स्थित सेंट बर्चमैन्स कॉलेज के शताब्दी कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा कम उम्र से ही जिम्मेदार नागरिकों को गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे वे समाज और देश में सार्थक योगदान देने में सक्षम होते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘शिक्षा चरित्र का निर्माण करती है और एक शिक्षित नागरिक समाज और राष्ट्र को आकार देता है।’’ उन्होंने लोगों से कहा कि सामाजिक या आर्थिक स्थिति चाहे जो भी हो, सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती है। उन्होंने जीवन भर खुले विचारों वाला बने रहने के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने राष्ट्रीय विकास के लिए अनुसंधान और तकनीकी विकास के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि औपनिवेशिक शासन के लिए केवल क्लर्क तैयार करने वाली शिक्षा का युग अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से बदल रहा है। उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘केवल प्रौद्योगिकी को अपनाने का समय समाप्त हो गया है। हमें प्रौद्योगिकी के निर्माता बनना होगा ताकि दुनिया भारतीय उत्पादों को अपना सके।’’
देश के भविष्य में विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन इसलिए संभव है क्योंकि भारत बदल रहा है और अपने गतिशील युवाओं से प्रेरित है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के दृष्टिकोण की ओर बढ़ते हुए सेंट बर्चमैन्स कॉलेज जैसे संस्थान देश में जिम्मेदार नागरिकों, नवोन्मेषकों और नेताओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि 1922 में स्थापित सौ साल पुराना यह महाविद्यालय महज कक्षाओं और गलियारों का परिसर नहीं बल्कि जब देश औपनिवेशिक शासन के अधीन था तब इस ऐतिहासिक महाविद्यालय ने बौद्धिक जागृति के केंद्र के रूप में कार्य किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि अनगिनत पूर्व छात्रों ने देश और विश्व भर में इस संस्थान का नाम रोशन किया है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि महान अभिनेता प्रेम नजीर और पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी और सी अच्युता मेनन इसी महाविद्यालय के पूर्व छात्र थे। उन्होंने कहा कि दो मुख्यमंत्री तैयार करना राज्य के विकास में संस्थान के सबसे बड़े योगदानों में से एक है।
उपराष्ट्रपति ने आपसी सम्मान और सामाजिक सौहार्द पर जोर देते हुए कहा कि दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना हमारी अपनी भावनाओं के सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर बर्चमैन्स सेंटर फॉर इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज और डॉ. के. एम. अब्राहम सेंटर फॉर एनर्जी एंड एनवायरनमेंट का उद्घाटन भी किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि पदभार ग्रहण करने के बाद यह केरल का उनका तीसरा दौरा है और इसे एक विशेष दौरा बताते हुए कहा ‘केरल अब ‘केरलम’ बन गया है,’ जो राज्य की गहरी सांस्कृतिक पहचान और गौरव को दर्शाता है।
भाषा अमित माधव
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