तृणमूल ने निर्वाचन आयोग पर एसआईआर की आड़ में ‘धांधली’ का आरोप लगाया, भाजपा का पलटवार

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तृणमूल ने निर्वाचन आयोग पर एसआईआर की आड़ में ‘धांधली’ का आरोप लगाया, भाजपा का पलटवार

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  • Publish Date - February 28, 2026 / 10:43 PM IST,
    Updated On - February 28, 2026 / 10:43 PM IST

कोलकाता, 28 फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल में शनिवार को एसआईआर के बाद प्रकाशित मतदाता सूचियों में 63 लाख से अधिक नाम हटाए जाने को लेकर तीखा हमला करते हुए, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग पर भाजपा के साथ मिलीभगत करके ‘‘धांधली’’ का आरोप लगाया।

दूसरी ओर, भाजपा ने कहा कि मतदाता सूची से घुसपैठियों और फर्जी मतदाताओं को हटा दिया गया है, जिन्होंने ‘‘कैंसर की तरह बंगाल के समाज को जकड़ लिया था।’’

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान हटाए गए और जोड़े गए नामों के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या 7.04 करोड़ से अधिक है। एसआईआर प्रक्रिया के बाद 63 लाख से अधिक लोगों का नाम मतदाता सूचियों से हटाया गया है। पिछले साल नवंबर में एसआईआर की शुरुआत से पहले राज्य में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से अधिक थी।

तृणमूल कांग्रेस ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि नैहाटी नगरपालिका के एक पार्षद और उनकी मां के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।

तृणमूल कांग्रेस ने पोस्ट में कहा, ‘‘भाजपा और निर्वाचन आयोग की चुपचाप की गई धांधली का पूरा सच अब बंगाल के सामने उजागर हो गया है…मतदाता सूची से नाम हटाने की साजिश में एक निर्वाचित प्रतिनिधि और उनके परिवार को ‘भूत’ की तरह गायब कर दिया गया है।’’

पार्टी ने पोस्ट में कहा, ‘‘क्या निर्वाचन आयोग ने अपनी आंखें मूंद ली हैं, और अपनी नाक के नीचे मौजूद असली मतदाताओं को पहचानने में असमर्थ है? या यह ‘वैनिश कुमार’ का गायब करने का घिनौना खेल है, जहां वह अपनी जादुई छड़ी घुमाकर असली मतदाताओं को गायब कर देते हैं, ताकि दिल्ली के अपने जमींदारों के लिए चुनाव में धांधली कर सकें।’’

तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को ‘‘वैनिश कुमार’’ कहकर संबोधित किया है और आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में वैध मतदाताओं को मतदाता सूची से हटाने की साजिश रची है।

पत्रकारों से बात करते हुए, तृणमूल के वरिष्ठ मंत्री फिरहाद हकीम ने आरोप लगाया कि भाजपा वास्तविक नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाने के अभियान पर है और उन्हें घुसपैठिया करार दे रही है, सिर्फ इसलिए कि उन लोगों ने भाजपा को वोट नहीं दिया।

दूसरी ओर, भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि एसआईआर के बाद की सूची से पता चलता है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में ‘‘फर्जी, घुसपैठिए और बाहरी मतदाताओं’’ की संख्या में भारी वृद्धि हुई थी, और अब मतदाता सूची से ‘‘इन तत्वों को हटा दिया गया है जिन्होंने बंगाल के समाज को कैंसर की तरह जकड़ लिया था।’’

भाषा शफीक देवेंद्र

देवेंद्र