राज्यसभा चुनाव: बीजद ने संतृप्त मिश्रा और डॉ. दत्तेश्वर होता को बनाया उम्मीदवार

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राज्यसभा चुनाव: बीजद ने संतृप्त मिश्रा और डॉ. दत्तेश्वर होता को बनाया उम्मीदवार

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  • Publish Date - February 28, 2026 / 10:42 PM IST,
    Updated On - February 28, 2026 / 10:42 PM IST

भुवनेश्वर, 28 फरवरी (भाषा) बीजू जनता दल (बीजद) ने पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. संतृप्त मिश्रा और प्रसिद्ध चिकित्सक दत्तेश्वर होता को राज्यसभा के आगामी चुनाव के लिए शनिवार को पार्टी उम्मीदवार घोषित किया।

इसके बाद, कांग्रेस ने ड़ॉ. दत्तेश्वर होता को समर्थन देने की घोषणा की।

इस कदम से ओडिशा से संसद के ऊपरी सदन में खाली होने वाली चौथी सीट के लिए प्रतिस्पर्धा और भी बढ़ गई है।

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव में दो सीट पर जीतना तय है, जबकि विपक्षी बीजद का एक सीट पर जीतना निश्चित है।

बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने कहा, “अगले महीने होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए हमारी पार्टी ने दो उम्मीदवार घोषित करने का फैसला किया है। पहले उम्मीदवार डॉ. संतृप्त मिश्रा हैं, जो हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। दूसरे उम्मीदवार ओडिशा के जाने-माने चिकित्सक दत्तेश्वर होता हैं।”

मिश्रा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कटक से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। वर्तमान में वह पटनायक के राजनीतिक सचिव के रूप में काम करते हैं, जबकि होता मूत्र संबंधी रोगों के प्रख्यात विशेषज्ञ हैं।

पटनायक ने बताया कि होता ओडिशा स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के पहले कुलपति और कटक में एससीबी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य भी रह चुके हैं।

विपक्ष के नेता ने कहा, “चूंकि वह (डॉ. होता) साझा उम्मीदवार हैं, इसलिए मैं सभी दलों से अपील करता हूं कि वे उनका समर्थन करें और उन्हें राज्यसभा भेजें।”

पटनायक ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि उन्हें दोनों उम्मीदवारों की जीत की उम्मीद है।

ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने पटनायक के डॉ. होता को साझा उम्मीदवार बनाने के फैसले की सराहना की।

दास ने दावा किया, “नवीन बाबू ने डॉ. होता को साझा उम्मीदवार बनाकर एक बहुत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। हम सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा संभावित खरीद-फरोख्त को रोकने के लिए उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करेंगे। साझा उम्मीदवार का समर्थन करने में कोई कठिनाई नहीं है।”

भाजपा के ओडिशा प्रभारी विजय पाल सिंह तोमर ने कहा कि पार्टी ओडिशा से राज्यसभा की अधिकतम सीट पर जीत हासिल करेगी।

राज्यसभा के चुनावी गणित के अनुसार, चुनाव जीतने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को कम से कम 30 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होगी।

ओडिशा की 147 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है।

इसलिए, भाजपा के उम्मीदवार आसानी से दो सीट जीत सकते हैं।

भाजपा के पास 22 मतों का अधिशेष होगा, जो तीन सांसदों के चुनाव के लिए आवश्यक संख्या से आठ कम है।

इसी प्रकार, विपक्षी बीजद के पास पिछले महीने दो विधायकों के निलंबित होने के बाद 48 विधायक हैं।

एक सांसद के चुनाव के बाद, उसके पास 18 प्रथम वरीयता मत होंगे, लेकिन दूसरी सीट जीतने के लिए उसे 12 अन्य मतों की आवश्यकता होगी।

कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं और माकपा का एक विधायक है।

पटनायक कांग्रेस के आलोचक रहे हैं। उन्होंने सोमवार को कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष के साथ चर्चा की थी।

दास ने कहा, “बैठक के दौरान मैंने प्रस्ताव रखा कि राज्यसभा चुनाव में विधायकों को भाजपा की खरीद-फरोख्त से बचाने के लिए एक साझा उम्मीदवार को मैदान में उतारा जाए। वह (पटनायक) भी इस बात से सहमत थे और उन्होंने आज दो नामों की घोषणा की। बैठक में जिन पांच नामों पर चर्चा हुई, उनमें डॉ. होता का नाम भी शामिल था।”

दास और पटनायक के बीच हुई बैठक के बारे में बीजद ने कोई टिप्पणी नहीं की।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने डॉ. होता की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने (डॉ. होता ने) राज्य के दूरदराज के इलाकों में कम से कम 100 स्वास्थ्य शिविर लगाकर लगभग एक लाख लोगों का मुफ्त इलाज किया है।

उन्होंने राज्य और लोकतंत्र के हित में डॉ. होता को उम्मीदवार बनाने का निर्णय लेने के लिए पटनायक को धन्यवाद दिया।

भाषा जितेंद्र दिलीप

दिलीप