अल नीनो के तेजी से मजबूत होने के आसार, वैश्चिक स्तर पर प्रतिकूल मौसम का खतरा बढ़ा : डब्ल्यूएमओ

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अल नीनो के तेजी से मजबूत होने के आसार, वैश्चिक स्तर पर प्रतिकूल मौसम का खतरा बढ़ा : डब्ल्यूएमओ

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  • Publish Date - July 3, 2026 / 05:53 PM IST,
    Updated On - July 3, 2026 / 05:53 PM IST

नयी दिल्ली, तीन जुलाई (भाषा) प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में आने वाले महीनों में अल नीनो की स्थिति मजबूत होने के आसार है, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में लू, सूखा, भारी वर्षा आदि का खतरा बढ़ जाएगा। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

‘डब्ल्यूएमओ वैश्विक सामयिक जलवायु’’ रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जुलाई-सितंबर के दौरान ‘अल नीनो’ तेजी से मजबूत होगी।

अल नीनो ‘अल नीनो दक्षिणी दोलन’(ईएनएसओ) के तीन चरणों में से एक है। यह ऐसी मौसमी घटना है जिसमें मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र के तापमान में बदलाव होता है और साथ ही वायुमंडल में भी उतार-चढ़ाव आते हैं।

जहां अल नीनो का धरती पर तापमान बढ़ाने वाला असर होता है, वहीं इसके उलट ला नीना आमतौर पर तापमान कम करने वाला असर डालता है। ईएनएसओ का एक तटस्थ चरण भी होता है।

डब्ल्यूएमओ महासचिव सेलेस्टे साउलो ने एक बयान में कहा, ‘‘अल नीनो की स्थिति पहले से ही बनी हुई है और डब्ल्यूएमओ के पूर्वानुमानों के मुताबिक इसके तेजी से मजबूत होने की आशंका है।’’

उन्होंने कहा,‘‘इससे दुनिया के कई इलाकों में सूखे और भारी बारिश की आशंका बढ़ जाएगी, साथ ही जमीन और समुद्र दोनों ही सतह पर गर्म हवाएं चलने का खतरा भी बढ़ जाएगा।’’

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 12 जून को अल नीनो की स्थिति शुरू होने की घोषणा की और कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान यह और मजबूत होगी।

अल नीनो मजबूत होने की स्थिति में आमतौर पर भारत में कम बारिश होती है।

भाषा धीरज अविनाश

अविनाश

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