पटना, तीन जुलाई (भाषा) केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को कहा कि वह बिहार की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह करेंगे कि भोजपुर जिले में पिछले महीने हुए भरत तिवारी कथित मुठभेड़ मामले में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों को सजा मिले।
वहीं, केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनके सहयोगी एवं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि ‘‘बिना लाइसेंस’’ वाला हथियार रखने वाले व्यक्ति पर गोली चलाना उचित था।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख पासवान ने राजधानी पटना से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित भरत तिवारी के पैतृक गांव बिलौती पहुंचकर शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘मैंने इस घटना को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से चर्चा की है। मैं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर उनसे आग्रह करूंगा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।’’
उन्होंने कहा कि पुलिस का काम कानून का पालन कराना है, न कि कानून अपने हाथ में लेना। पासवान ने कहा, ‘‘यदि भरत तिवारी किसी गलत काम में शामिल था तो उसके खिलाफ मामला दर्ज किया जा सकता था और कानून के अनुसार उसे सजा मिलती। उसे मारने को किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।’’
उन्होंने कहा कि इस मामले में दोषी सभी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। पासवान ने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से इनमें से एक अधिकारी को हाल ही में पदोन्नति भी मिल गई। इससे लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या व्यवस्था गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत करती है।’’
स्वयंभू सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता भारत तिवारी की 17 जून को उस समय गोली लगने से मौत हो गई थी, जब स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी सोशल मीडिया पर कथित भड़काऊ पोस्ट के संबंध में पूछताछ के लिए उसके घर पहुंचे थे और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी।
शुरुआत में अधिकारियों ने दावा किया था कि तिवारी मानसिक रूप से अस्थिर था और उसने पुलिस पर बंदूक तान दी थी, इसलिए आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी। हालांकि, राज्य सरकार पर कथित ‘एनकाउंटर राज’ चलाने के आरोप लगने के बाद उसने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए।
मामले में संबंधित थाने के प्रभारी (एसएचओ) सहित चार पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जबकि अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) का तबादला पटना कर दिया गया है। उन्हें निषेध एवं राज्य नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो में पुलिस उपाधीक्षक के पद पर तैनात किया गया है, जिसे लेकर कई लोगों का मानना है कि यह वस्तुत: ‘‘पदोन्नति’’ है।
भाजपा के प्रमुख सहयोगी पासवान का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब विपक्षी दल इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं।
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पिछले सप्ताह बिलौती गांव गए थे। इससे पहले मृतक के परिजन पटना स्थित उनके ‘‘आश्रम’’ में जाकर उनसे मामले को उठाने का आग्रह कर चुके थे। किशोर ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार जांच कर रहे सेवानिवृत्त न्यायाधीश की जगह ‘‘’’पटना उच्च न्यायालय के किसी कार्यरत न्यायाधीश से जांच नहीं कराती है तो मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।
इस बीच, पत्रकारों ने जब हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के संस्थापक मांझी से इस मुठभेड़ पर प्रतिक्रिया मांगी तो उन्होंने पुलिस और प्रशासन का खुलकर समर्थन किया।
गया से सांसद मांझी ने कहा, ‘‘पुलिस की कार्रवाई उचित थी। यदि पुलिस गोली नहीं चलाती तो पुलिसकर्मी खुद मारे जाते। पुलिस ने कानून के अनुसार कार्रवाई की और आरोपी की कमर के नीचे गोली मारी। यदि उनकी मंशा उसे मारने की होती तो वे उसके सिर या सीने में गोली मारते।’’
मांझी ने कहा कि तिवारी के पास ‘‘बिना लाइसेंस’’ का रिवॉल्वर था, जिसे उसने पुलिस अधिकारियों की ओर तान दिया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि भरत तिवारी के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत एक मामला भी दर्ज था।
जब उनसे पूछा गया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी चिराग पासवान का रुख उनके विचारों से बिल्कुल अलग है, तो मांझी ने कहा, ‘‘क्या मैं वही दोहराऊं जो वह (चिराग पासवान) कहते हैं?’’
उल्लेखनीय है कि मांझी और पासवान के बीच लंबे समय से राजनीतिक मतभेद रहे हैं। दोनों दलित समुदाय के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं, हालांकि चिराग पासवान को अपने दिवंगत पिता रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत मिली है, जिन्हें बिहार से उभरने वाले अनुसूचित जाति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में माना जाता है।
दिवंगत रामविलास पासवान 1970 के दशक में हाजीपुर लोकसभा सीट से रिकॉर्ड मतों के अंतर से जीत दर्ज कर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुए थे। वर्ष 2020 में निधन होने तक वह कई बार सांसद रहे और जनता दल, भारतीय जनता पार्टी तथा कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकारों में केंद्रीय मंत्री रहे।
इसके विपरीत, 82 वर्षीय मांझी बिहार में कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल (यूनाइटेड) की सरकारों में अपेक्षाकृत कम चर्चित मंत्री रहे। वर्ष 2014 में नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के बाद वह मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन करीब आठ महीने बाद नीतीश कुमार ने दोबारा पद संभालते हुए उन्हें हटा दिया।
भाषा कैलाश
अमित
अमित