नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) कई देशों की चुनाव प्रबंधन संस्थाओं ने ‘‘शुद्ध’’ मतदाता सूची तैयार करने और प्रत्येक मतदाता को एक फोटो पहचान पत्र प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है।
लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन के मौके पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि विभिन्न चुनाव प्रबंधन निकायों के प्रमुखों और सदस्यों ने जो बातें रखी हैं उनमें शुद्ध मतदाता सूची की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
कुमार ने अपने समापन भाषण में कहा, ‘कानून के अनुसार सभी मतदाताओं के नाम वाली शुद्ध मतदाता सूची किसी भी लोकतंत्र की नींव है।’
उनका यह भी कहना था कि चुनाव प्रबंधन निकायों को चुनाव के सरल और पारदर्शी संचालन के लिए सभी मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र प्रदान करने का प्रयास करना चाहिए।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने चुनावों में सभी स्तरों पर सभी हितधारकों की भागीदारी की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।
चुनाव आयोग ने अंतरराष्ट्रीय चुनाव प्रबंधन निकायों के साथ सहयोग करने की भी पेशकश की ताकि उन्हें ‘ईसीआईनेट’ ऐप की तरह प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म विकसित करने में मदद मिल सके और साथ ही चुनाव प्रबंधन में उनके अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण सहायता भी मिल सके।
निर्वाचन आयोग ने सम्मेलन में भाग लेने वाले विभिन्न चुनाव प्रबंधन निकायों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकों के दौरान ये पेशकश की।
आयोग ने मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू किया है।
एसआईआर का दूसरा चरण पिछले साल चार नवंबर को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में शुरू हुआ।
असम में मतदाता सूची का अलग से ‘विशेष पुनरीक्षण’ जारी है।
राज्यों में अंतिम एसआईआर ‘कट-ऑफ’ तिथि के रूप में काम करेगी, जैसे बिहार की 2003 की मतदाता सूची का उपयोग निर्वाचन आयोग द्वारा गहन पुनरीक्षण के लिए किया गया था।
अधिकतर राज्यों में मतदाता सूची का अंतिम एसआईआर 2002 और 2004 के बीच हुआ था।
भाषा हक
हक नरेश
नरेश