आबकारी मामला: ईडी ने अपने खिलाफ विशेष अदालत की टिप्पणियों को हटाने के लिए अदालत का रुख किया

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आबकारी मामला: ईडी ने अपने खिलाफ विशेष अदालत की टिप्पणियों को हटाने के लिए अदालत का रुख किया

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  • Publish Date - March 9, 2026 / 07:11 PM IST,
    Updated On - March 9, 2026 / 07:11 PM IST

नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाल ही में सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे आबकारी नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य को आरोपमुक्त करते हुए निचली अदालत द्वारा धनशोधन जांच के संबंध में की गई टिप्पणी को हटाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है।

ईडी ने कहा कि 27 फरवरी का आदेश ‘न्यायिक अधिकार क्षेत्र का स्पष्ट उल्लंघन’ था क्योंकि अदालत ने एजेंसी के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए उसके साक्ष्यों पर ना तो गौर किया और ना ही उसकी बात सुनी।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के आरोपपत्र में आम आदमी पार्टी (आप) की तत्कालीन सरकार द्वारा लागू की गई 2021 की दिल्ली आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं का उल्लेख है। सीबीआई और ईडी ने इस मामले की स्वतंत्र रूप से जांच की।

विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह की अदालत ने पीएमएलए और ईडी जांच के संबंध में कई टिप्पणियां की थीं। आदेश में विशेष रूप से उल्लेख किया गया कि उच्चतम न्यायालय ने 2022 के विजय मदनलाल चौधरी मामले में कहा था कि एक बार मूल मामला (सीबीआई मामला) समाप्त होने पर ईडी मामला भी अनिवार्य रूप से खत्म हो जाएगा।

धनशोधन रोधी एजेंसी ने सात मार्च को दायर अपनी याचिका में आदेश के कई पैराग्राफ का हवाला देते हुए कहा कि अदालत की उसके खिलाफ की गई टिप्पणियां ‘प्रतिकूल, व्यापक और अवांछित’ थीं क्योंकि सुनवाई में ईडी पक्षकार नहीं थी और अदालत के समक्ष केवल सीबीआई की जांच के गुण-दोष पर ही विचार किया जा रहा था।

एजेंसी ने कहा कि यदि इस प्रकार की व्यापक और निराधार टिप्पणियों को बरकरार रहने दिया गया जो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पीठ पीछे केवल अनुमानों के आधार पर की गई हैं और जिनका आधार ईडी द्वारा एकत्रित किसी भी सामग्री या साक्ष्य पर नहीं है तो इससे सार्वजनिक हित के साथ-साथ याचिकाकर्ता (ईडी) को भी गंभीर और अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।

ईडी ने कहा कि वह सीबीआई की कार्यवाही में किसी भी रूप में पक्षकार नहीं थी और प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज होने से पहले उसे सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया, जिससे ‘प्राकृतिक न्याय के मूलभूत सिद्धांतों का घोर उल्लंघन’ हुआ।

ईडी ने कहा कि इसलिए, धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एजेंसी द्वारा स्वतंत्र रूप से की गई जांच से संबंधित पैरा को ‘हटा दिया जाना’ चाहिए क्योंकि वे न्यायिक अधिकार क्षेत्र का स्पष्ट उल्लंघन हैं।

एजेंसी ने उच्चतम न्यायालय के विभिन्न फैसलों का भी हवाला देते हुए कहा कि पीएमएलए के तहत दर्ज मामला अनुसूचित अपराध के मुकदमे से स्वतंत्र रूप से चल सकता है और धनशोधन अपने आप में एक स्वतंत्र अपराध है।

ईडी ने इस मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 40 आरोपियों के खिलाफ अब तक कुल नौ आरोपपत्र दाखिल किए हैं।

भाषा अमित नरेश

नरेश