नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और 22 अन्य लोगों को राजनीतिक रूप से संवेदनशील शराब नीति मामले में आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने साथ ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा ‘साउथ ग्रुप’ शब्द के प्रयोग पर अप्रसन्नता जताते हुए उसे भाषा के चयन में संयम बरतने को लेकर चेतावनी दी।
अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह की शब्दावली का कानून में कोई आधार नहीं है, यह किसी विधिक रूप से मान्य वर्गीकरण के अनुरूप नहीं है और आपराधिक दायित्व को नियंत्रित करने वाले वैधानिक ढाँचे से पूर्णतः परे है।
विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘‘अदालत इस बात पर अपनी चिंता दर्ज कराना आवश्यक समझती है कि जांच एजेंसी द्वारा आरोपियों के एक समूह का वर्णन करने के लिए बार-बार और जानबूझकर ‘साउथ ग्रुप’ शब्द का प्रयोग किया गया, जो स्पष्ट रूप से उनके क्षेत्रीय मूल या निवास स्थान पर आधारित है।’
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि शेष आरोपियों के लिए किसी तुलनीय क्षेत्रीय विवरण का प्रयोग नहीं किया गया है। अभियोजन पक्ष के विवरण में किसी ‘नार्थ ग्रुप’ या इसी तरह के वर्गीकरण का उल्लेख नहीं है। इसलिए, भौगोलिक रूप से परिभाषित नामांकन को चुनिंदा रूप से अपनाना स्पष्ट रूप से मनमाना और अनुचित है।’
अदालत ने कहा कि क्षेत्र-आधारित वर्गीकरण से पूर्वाग्रही धारणा उत्पन्न हो सकती है। अदालत ने कहा कि विधि के समक्ष समानता और देश की एकता एवं अखंडता पर आधारित संवैधानिक व्यवस्था में क्षेत्रीय पहचान से जुड़े विशेषणों का कोई वैध जांच या अभियोजन उद्देश्य नहीं है और वे स्पष्ट रूप से अनुचित हैं।
अदालत ने कहा, ‘कानूनी रूप से मान्य आधार के अभाव के बावजूद, इस वर्गीकरण का निरंतर उपयोग धारणा को प्रभावित करने, अनपेक्षित पूर्वाग्रह उत्पन्न करने और साक्ष्य सामग्री से ध्यान भटकाने का वास्तविक जोखिम पैदा करता है, जबकि केवल साक्ष्य ही न्यायनिर्णय का मार्गदर्शन करने चाहिए।’
न्यायाधीश ने कहा कि पहचान-आधारित वर्गीकरण की अनुचितता कोई अमूर्त चिंता का विषय नहीं है।
न्यायाधीश ने केंद्रीय एजेंसी से आरोपपत्र और जांच विवरण तैयार करते समय भाषा के चयन में अधिक सावधानी, सतर्कता और संयम बरतने के लिए कहा।
न्यायाधीश ने कहा, ‘आरोपियों का वर्णन पूरी तरह से निष्पक्ष, साक्ष्य-आधारित होने के साथ ही विभाजनकारी या अपमानजनक भाव वाले शब्दों से मुक्त होना चाहिए।’
उन्होंने कहा कि इस तरह की शब्दावली का प्रयोग संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है।
भाषा अमित दिलीप
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