नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सोमवार को कहा कि ‘संवैधानिक नैतिकता’ के हित में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को रद्द किया जाना चाहिए।
उसका कहना था कि यह विधेयक अत्यधिक सरकारी नियंत्रण की स्थिति पैदा कर सकता है और संघवाद को नष्ट कर सकता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में पार्टी महासचिव एमए बेबी ने प्रस्तावित संशोधन पर ‘‘गहरी चिंता’’ व्यक्त की।
बेबी ने पत्र में कहा, ‘‘संवैधानिक नैतिकता और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के हित में हम मांग करते हैं कि सरकार इस प्रस्तावित कानून को तुरंत रद्द करे।’’
माकपा नेता के अनुसार, विधेयक में एक शक्तिशाली ‘नामित प्राधिकरण’ बनाने का प्रस्ताव है जो उन गैर सरकारी संगठनों द्वारा विदेशी धन से बनाई गई उन संपत्तियों को प्रबंधित करने और निपटान करने के लिए होगी, जिनका पंजीकरण निलंबित या रद्द कर दिया गया है अथवा नवीनीकृत नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह एक ऐसा प्रावधान है जो नागरिक समाज संगठनों के अस्तित्व को खतरे में डालता है।’’
उन्होंने कहा, ‘पर्याप्त न्यायिक निरीक्षण के बिना, कार्यपालिका को ऐसी संपत्तियों को स्थायी रूप से निहित करने की शक्ति देना एक दंडात्मक उपाय है जो नियामक निरीक्षण के दायरे से कहीं आगे जाता है।’’
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बीते बुधवार को लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया था। इस विधेयक का उद्देश्य विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधन करना है।
राय ने कहा था कि यह विधेयक विदेशी अंशदान के उपयोग को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाएगा।
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