तिरुवनंतपुरम में पांच दिवसीय इसरो-ईएसए हेलियोफिजिक्स कार्यशाला शुरू

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तिरुवनंतपुरम में पांच दिवसीय इसरो-ईएसए हेलियोफिजिक्स कार्यशाला शुरू

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  • Publish Date - January 22, 2026 / 11:09 AM IST,
    Updated On - January 22, 2026 / 11:09 AM IST

बेंगलुरु, 22 जनवरी (भाषा) तिरुवनंतपुरम में आदित्य-एल1, सौर कक्षक और प्रोबा-3 मिशनों की संभावनाओं पर केंद्रित पांच दिवसीय इसरो-ईएसए हेलियोफिजिक्स कार्यशाला आयोजित की जा रही है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बृहस्पतिवार को बयान में कहा कि वह यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के साथ मिलकर इस कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है और तिरुवनंतपुरम स्थित भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान इसका समन्वय कर रहा है।

इसरो ने कहा, “यह कार्यक्रम वैश्विक हेलियोफिजिक्स समुदाय को एक साथ लाता है ताकि इन सौर मिशनों के माध्यम से नए वैज्ञानिक अवसरों का पता लगाया जा सके। इस कार्यशाला में यूरोप और अन्य देशों के लगभग 50 सौर और हेलियोफिजिक्स विशेषज्ञ, शोधकर्ता और छात्र, साथ ही लगभग 150 भारतीय सौर और हेलियोफिजिक्स विशेषज्ञ, शोधकर्ता और छात्र भाग ले रहे हैं।”

इसरो ने बताया कि यह वर्कशॉप अदित्य-एल1, सोलर ऑर्बिटर और प्रोबा-3 से उपलब्ध अद्वितीय सौर और हेलियोस्फेरिक डेटा का उपयोग करने पर केंद्रित है। इन मिशनों के अलग-अलग दृष्टिकोण और कक्षीय स्थितियां सूर्य और हेलियोस्फीयर का ऐसा व्यापक दृश्य प्रदान करती हैं, जो किसी एक मिशन से अकेले संभव नहीं है।

हेलियोस्फीयर सूर्य से निकलने वाली सौर हवा और उसके चुंबकीय क्षेत्र द्वारा बनाया गया एक विशाल, बुलबुले जैसा क्षेत्र है, जो पूरे सौरमंडल को घेरता है और इसे अंतरतारकीय माध्यम यानी इंटरस्टेलर मीडियम से बचाता है, जिससे ब्रह्मांडीय किरणों और बाहरी कणों का प्रभाव कम होता है। यह सौरमंडल के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करता है। संक्षेप में कहा जा सकता है कि हेलियोस्फीयर, सूर्य और सौर मंडल के आसपास का क्षेत्र है।

भाषा खारी मनीषा

मनीषा