(तस्वीरों के साथ)
(कुणाल दत्त)
नयी दिल्ली, 24 जनवरी (भाषा) दूसरी पीढ़ी के सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट अमित चौधरी गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्य पथ पर स्काउट्स की मिश्रित टुकड़ी का नेतृत्व करेंगे, लेकिन उनके लिए यह एक व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ उनके पिता के प्रति एक यादगार श्रद्धांजलि भी होगी, जो वर्ष 1990 के गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा थे।
उच्च पर्वतीय इलाकों और खराब मौसम के लिए बने विशेष बूट और विशेष धूप के चश्मे के साथ बहुस्तरीय वर्दी पहने चौधरी और उनकी टुकड़ी के सदस्यों ने शुक्रवार को बारिश के बीच परेड के ‘फुल ड्रेस रिहर्सल’ में भाग लिया।
‘अरुणाचल स्काउट्स’ के इस युवा अधिकारी ने, यहां होने वाले इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में भाग लेने वाली कई अन्य सैन्य टुकड़ियों के नेतृत्वकर्ताओं के साथ पूर्वाभ्यास के बाद इंडिया गेट के पास एक सैन्य इकाई के परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने हमेशा परेड का हिस्सा बनने का सपना देखा है। बचपन में, मैं टीवी पर परेड देखता था और घर के कमरे में मार्च करता था। मेरे पिता वर्ष 1990 में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में शामिल थे और वह ‘ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स’ की टुकड़ी का हिस्सा थे।’’
इस संवाद से पहले, दिल्ली क्षेत्र के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल नवराज ढिल्लों ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि ‘एकीकृत ऑपरेशन सेंटर’ विषय पर आधारित एक ‘विशेष सेना झांकी’ भी सैन्य प्रदर्शन का हिस्सा होगी, जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की याद दिलाएगी और ‘हमारी रणनीतिक योजना प्रक्रिया’ को दर्शाएगी।
इसके अलावा, संचालनात्मक भूमिका में एक मिश्रित स्काउट्स टुकड़ी और सेना की पांच अन्य मार्च करने वाली टुकड़ियां परेड में शामिल होंगी जिनमें राजपूत रेजिमेंट, असम रेजिमेंट, जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री, आर्टिलरी रेजिमेंट और भैरव बटालियन शामिल हैं।
प्रदर्शित किए जाने वाले रक्षा उपकरणों में ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल प्रणाली, मध्यम दूरी की सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल (एमआरएसएएम) प्रणाली, उन्नत टोएड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस), धनुष तोप, शक्तिबन रेजिमेंट, दिव्यास्त्र बैटरी, यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम ‘सूर्यास्त्र’, सड़क पर चलने वाले मानवरहित वाहन और विभिन्न मंचों पर लगे कुछ ड्रोनों का स्थैतिक प्रदर्शन शामिल होगा।
पहली बार, ‘माउंटेड 61 कैवलरी’ की घुड़सवार टुकड़ी के सदस्य युद्धक अंदाज में नजर आएंगे, और स्वदेशी प्लेटफॉर्म सहित प्रमुख सैन्य उपकरण सैनिकों के साथ ‘चरणबद्ध युद्ध संरचना’ के तहत कर्तव्य पथ पर परेड करेंगे।
कई टुकड़ी के कमांडरों में एक समान बात यह है कि उनके परिवार की कई पीढ़ियों ने सशस्त्र बलों में सेवा की है, जिनमें युद्धों में लड़ना भी शामिल है।
एकीकृत ऑपरेशन सेंटर का प्रतिनिधित्व करने वाले दल का नेतृत्व करने वाली कैप्टन समीरा जेड बुट्टर का कहना है कि इस सम्मान को पाकर वे गर्व और विनम्रता दोनों से भरी हुई हैं।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मैं चौथी पीढ़ी की सैन्य अधिकारी हूं। मेरे पिता, दादा (ब्रिगेडियर संपूर्ण सिंह) और परदादा, सभी ने सेना में सेवा की है। और अब परेड के हिस्से के रूप में कर्तव्य पथ पर मार्च करने का सम्मान पाकर मुझे विशेष अनुभूति हो रही है।’’
युवा अधिकारी ने बताया कि उनके दादा ने 1965 के युद्ध में लड़ाई लड़ी थी और उन्हें दो वीरता पुरस्कार मिले थे – ‘महावीर चक्र’ और ‘वीर चक्र’।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे एकीकृत ऑपरेशन सेंटर की झांकी बहुत ही अनूठी है और यह परेड के दिन दर्शकों के लिए एक अचरज होगी।’
छब्बीस वर्षीय कैप्टन अहान कुमार, अपने घोड़े ‘रणवीर’ पर सवार होकर परेड में प्रतिष्ठित ‘61 कैवलरी’ की टुकड़ी का नेतृत्व करेंगे।
अहान के दादा एक पूर्व सैनिक रहे हैं,जबकि उनके पिता दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार हैं, जो परेड कमांडर होंगे। अहान ने अपने हनोवरियन नस्ल के घोड़े के साथ 2025 की परेड में भी यही भूमिका निभाई थी।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘पिछले साल हमने अपनी औपचारिक वर्दी पहनी थी और तलवार धारण की थी। इस बार हम अपने युद्ध साजो-सामान में हैं, इसलिए इस परेड में भी यह एक नया अनुभव है।’’ लगभग 90 मिनट तक चलने वाली इस परेड में 18 मार्चिंग टुकड़ियां और 13 बैंड भाग लेंगे।
परेड में जांस्कर टट्टू, बैक्ट्रियन ऊंट, शिकारी पक्षी (चील) और सेना के कुत्तों से बनी एक पशु टुकड़ी भी शामिल होगी।
‘रिमाउंट वेटरनरी कोर’ (आरवीसी) की टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली कैप्टन हर्षिता राघव ने कहा, ‘‘ये जानवर भारतीय सेना के ही सिपाही हैं। वास्तव में, ये मूक योद्धा हैं।’’
मध्य प्रदेश के भोपाल की मूल निवासी राघव ने बताया कि उनके पिता भारतीय वायु सेना में कार्यरत थे और वह ‘आरवीसी में महिला अधिकारियों के पहले बैच में से एक हैं’।
तीसरी पीढ़ी के सैन्य अधिकारी कैप्टन विकास यादव जमीन पर चलने वाले मानवरहित वाहनों जैसे उपकरणों से लैस एक दल का नेतृत्व करेंगे और वह प्रथम गोरखा राइफल्स की चौथी बटालियन में सेवारत हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इन मानवरहित वाहनों का उपयोग निगरानी और रसद कार्यों के लिए किया जाता है, और ये स्वयं भी दिशा-निर्देशित हो सकते हैं। ये मिशन-उन्मुख पेलोड और हथियार ले जा सकते हैं, और इनका उपयोग बंकरों को नष्ट करने जैसे कार्यों के लिए किया जा सकता है।’’
भाषा संतोष दिलीप
दिलीप