भावी महामारियों से निपटने के लिए अभी से काम किया जाना चाहिए: नीति आयोग के सदस्य वी के पॉल

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भावी महामारियों से निपटने के लिए अभी से काम किया जाना चाहिए: नीति आयोग के सदस्य वी के पॉल

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  • Publish Date - January 24, 2026 / 09:10 PM IST,
    Updated On - January 24, 2026 / 09:10 PM IST

चंडीगढ़, 24 जनवरी (भाषा) नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. पॉल ने शनिवार को यहां आईएमटेक के वैज्ञानिकों के लिए एक ‘रोडमैप’ प्रस्तुत किया और उनसे उन प्राथमिक रोगजनकों पर अनुसंधान करने का आह्वान किया जिनसे भविष्य में महामारी फैलने की आशंका है।

डॉ. पॉल ने कहा, ‘‘हम युद्ध की तैयारी तब करते हैं जब हम युद्ध में नहीं होते। इसी तरह, भविष्य की महामारियों से निपटने के लिए बहुत सारा काम अभी आईएमटेक जैसी सूक्ष्मजीव प्रयोगशालाओं में किया जाना चाहिए। शासन, निगरानी, ​​अनुसंधान और साझेदारी भविष्य की महामारी से निपटने की रणनीति के आधार स्तंभ हैं।’’

उन्होंने कहा कि किसी भी महामारी से निपटने की रणनीति के लिए भारत में द्वितीय चरण के नैदानिक ​​परीक्षण तक के उपाय विकसित करना, उद्योग के साथ साझेदारी में काम करना, कुशल आपूर्ति शृंखला बनाना और क्षमताओं तथा गति का प्रदर्शन महत्वपूर्ण होना चाहिए।

चंडीगढ़ स्थित सीएसआईआर-सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएमटेक) ने शनिवार को अपना 42वां स्थापना दिवस मनाया।

इस अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें नीति आयोग में स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा विषयों का नेतृत्व कर रहे डॉ. पॉल द्वारा दिया गया ‘भविष्य की महामारी की तैयारी: हमें अभी क्या करना चाहिए’ विषयक व्याख्यान भी शामिल है।

डॉ. पॉल ने उल्लेख किया कि कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों को कम करने के लिए केंद्र सरकार के सभी प्रयास विज्ञान और साक्ष्यों पर आधारित थे, जिसमें सरकार, राष्ट्र और समाज कार्य योजना के विभिन्न पक्ष थे।

उन्होंने महामारी के दौरान आईएमटेक द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की, जिसमें पहचान और निगरानी के लिए आरटी-पीसीआर परीक्षण करना, ‘कोविड-19 सबयूनिट’ प्रोटीन-आधारित वैक्सीन विकसित करना और सार्स-कोव-2 के खिलाफ ‘एंटीवायरल स्क्रीनिंग’ शुरू करना शामिल है।

आईएमटेक के एक बयान के अनुसार उन्होंने भविष्य में महामारी की तैयारी के सिलसिले में इस बात पर जोर दिया कि वैज्ञानिकों को उन रणनीतियों और उपायों के साथ काफी पहले से तैयार रहने की आवश्यकता है, जो प्रकोप के पहले 100 दिनों के भीतर उपलब्ध कराए जा सकें।

इस अवसर पर सीएसआईआर-आईएमटेक के निदेशक डॉ. संजीव खोसला ने कहा, ‘‘सूक्ष्मजीवों और जीवन पर प्रभाव के सिलसिले में नवाचार करना पिछले चार दशकों से आईएमटेक परिवार के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए मार्गदर्शक शक्ति रही है।

भाषा राजकुमार सुरेश

सुरेश