गुजरात के गिर में पांच शेरों की मौत, दो की जान बेबिशिया वायरस के संक्रमण से जाने का संदेह

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गुजरात के गिर में पांच शेरों की मौत, दो की जान बेबिशिया वायरस के संक्रमण से जाने का संदेह

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  • Publish Date - May 26, 2026 / 04:15 PM IST,
    Updated On - May 26, 2026 / 04:15 PM IST

अहमदाबाद, 26 मई (भाषा) गुजरात के गिर वन क्षेत्र में पांच शेरों की मौत की बात सामने आई है, जिनमें दो शावकों की जान बेबेशिया वायरस के संक्रमण के कारण जाने का संदेह है, जबकि तीन अन्य शेर ने प्राकृतिक कारणों और आपसी संघर्ष की घटनाओं में दम तोड़ दिया। राज्य के वन मंत्री अर्जुन मोधवाडिया ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

हालांकि, मोधवाडिया ने गिर के जंगलों में किसी बड़ी महामारी या बीमारी के प्रकोप की आशंका से इनकार किया। गिर के जंगल दुनिया में एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक निवास स्थान रह गए हैं।

मोधवाडिया ने एक बयान में कहा, “कुछ खबरों में शेरों की मौत बेबेशिया वायरस के संक्रमण से होने का दावा किया गया है, लेकिन केवल दो शेरों की जान जाने के पीछे इस संक्रमण का होने का संदेह है। बाकी (तीन) शेरों की मौत आपसी लड़ाई या अन्य कारणों से हुई।”

मंत्री ने बताया कि बेबेशिया वायरस किलनी (टिक) नामक कीड़े के जरिये फैलता है और इससे संक्रमित जानवरों में कमजोरी, खांसी और नाक बहने जैसे लक्षण उभर सकते हैं।

उन्होंने कहा, “वन विभाग के अधिकारी और पशु चिकित्सकों की टीम बेबेशिया वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।”

मोधवाडिया के मुताबिक, अधिकारी संदिग्ध शेरों की पहचान कर रहे हैं, नमूने एकत्र कर रहे हैं और उन्हें उचित उपचार प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि निवारक उपायों के तहत जानवरों के शरीर से किलनी हटाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।

मोधवाडिया ने कहा, “वन विभाग पूरी तरह से तैयार है और यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है कि यह संक्रमण वन क्षेत्र के अन्य हिस्सों में न फैले। किसी को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है।”

वन बल प्रमुख का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) जयपाल सिंह ने कहा कि ये मौतें अलग-अलग घटनाओं में हुईं और इनमें “कुछ भी असामान्य” नहीं था।

सिंह ने कहा, “ऐसी घटनाएं इसलिए होती हैं, क्योंकि शावकों के जीवित रहने की दर आम तौर पर केवल 50 प्रतिशत होती है। हालांकि, पशु चिकित्सा सुविधाओं में वृद्धि और मजबूत निगरानी की बदौलत हम मृत्यु दर को काफी कम रखने में सफल रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि दोनों शावकों ने काफी कम उम्र में दम तोड़ दिया, जबकि दो शेरों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई और एक अन्य शेर की जान आपसी लड़ाई में चली गई।

सिंह ने कहा, “चिंता की कोई बात नहीं है। किसी महामारी या बीमारी के फैलने का खतरा नहीं है, क्योंकि दोनों शावक गिर के जंगल में अलग-अलग जगहों पर मृत मिले।” उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं आमतौर पर कम प्रतिरक्षा क्षमता के कारण होती हैं।

इससे पहले, 2018 में गुजरात में एक महीने के भीतर कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) और प्रोटोजोआ संक्रमण के कारण 11 शेरों की मौत हो गई थी।

साल 2025 की गणना में गुजरात में 891 एशियाई शेर होने की बात सामने आई थी।

भाषा पारुल वैभव

वैभव