नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने चारा घोटाले के एक मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को जमानत देने संबंधी झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी बी वराले की पीठ ने उच्च न्यायालय से कहा कि वह इस मामले में लंबित अपीलों पर सुनवाई में तेजी लाएं और संभव हो तो छह महीने के अंदर उन पर फैसला करे।
शीर्ष अदालत उच्च न्यायालय के जुलाई 2019 के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
पीठ ने कहा, ‘‘हम इस विवादित आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं…।’’
सीबीआई ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि अदालत ने ‘‘गलत तरीके से’’ अधीनस्थ अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को निलंबित कर दिया और चारा घोटाले के एक मामले में राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख को जमानत पर रिहा कर दिया।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री यादव को देवघर कोषागार से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया था जिसमें 89 लाख रुपये के गबन का आरोप था।
सीबीआई की विशेष अदालत ने यादव को दोषी ठहराते हुए साढ़े तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी।
देवघर कोषागार से कथित रूप से धोखाधड़ी के जरिए 89.27 लाख रुपये निकालने के मामले में यादव की सजा निलंबित करते हुए और उन्हें जमानत देते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि उन्होंने अपनी सजा का आधा हिस्सा पूरा कर लिया है।
भाषा सुरभि मनीषा
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