nia arrested/ image source: the statesman
Foreign Nationals Arrested India: नई दिल्ली: पूर्वोत्तर भारत में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साजिश का खुलासा किया है, जिसने देश की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। National Investigation Agency (NIA) ने रूसी एजेंसियों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि ये भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों की साजिश रच रहे थे और म्यांमार के हथियारबंद गुटों को आधुनिक युद्ध तकनीक की ट्रेनिंग दे रहे थे। यह पूरा नेटवर्क टूरिस्ट वीजा की आड़ में सक्रिय था, जिससे इसकी गतिविधियां और भी संदिग्ध बन गईं।
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह यूरोप से बड़े पैमाने पर ड्रोन और तकनीकी उपकरण लाकर म्यांमार के विद्रोही संगठनों को दे रहा था। ये लोग पहले भारत में टूरिस्ट वीजा पर आए, फिर Mizoram के रास्ते अवैध रूप से सीमा पार कर म्यांमार में घुस गए। वहां उन्होंने विद्रोही गुटों को ड्रोन संचालन और आधुनिक युद्ध तकनीक की ट्रेनिंग दी। बताया जा रहा है कि यह ग्रुप पहले भी कई बार इस तरह की गतिविधियों को अंजाम दे चुका है। हाल ही में ये लोग Guwahati पहुंचे और वहां से मिजोरम होते हुए म्यांमार में दाखिल हुए। भारत लौटने पर 13 मार्च 2026 को NIA ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल 8 अन्य यूक्रेनी नागरिकों की तलाश जारी है, जो इस नेटवर्क का हिस्सा बताए जा रहे हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक को Kolkata एयरपोर्ट से पकड़ा गया, जबकि तीन यूक्रेनी नागरिकों को नई दिल्ली और तीन को Chaudhary Charan Singh International Airport से गिरफ्तार किया गया। अब एजेंसियां इन सभी के डिजिटल फुटप्रिंट और पिछले कई महीनों की गतिविधियों की गहन जांच कर रही हैं। मामले को गंभीर मानते हुए दिल्ली की Patiala House Court ने सभी आरोपियों को 27 मार्च तक NIA की हिरासत में भेज दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद Manipur, Assam और मिजोरम समेत पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड मैथ्यू एरॉन वैनडाइक है, जो अमेरिका के मैरीलैंड राज्य के बाल्टीमोर का रहने वाला है। वह ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल (SOLI)’ नामक संगठन का संस्थापक है और पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में शामिल रह चुका है। 2011 में लीबिया के गृह युद्ध के दौरान वह सुर्खियों में आया था, इसके बाद उसने इराक में ISIS के खिलाफ लड़ाई, सीरिया में विद्रोह और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ट्रेनिंग जैसी गतिविधियों में हिस्सा लिया। एजेंसियों का मानना है कि म्यांमार में चल रहे गृहयुद्ध और सीमा पर सक्रिय संगठनों जैसे चिन नेशनल आर्मी और अराकान आर्मी के जरिए यह नेटवर्क भारत के उग्रवादी संगठनों तक ड्रोन तकनीक पहुंचा सकता था। इससे पूर्वोत्तर भारत में ड्रोन हमलों का खतरा बढ़ सकता है, जिसे देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं।