पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के स्वास्थ्य में काफी सुधार
पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के स्वास्थ्य में काफी सुधार
कोलकाता, तीन अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के स्वास्थ्य में काफी सुधार हुआ है और उनकी तबीयत ठीक है। भट्टाचार्य का इलाज कर रहे चिकित्सकों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
चिकित्सकों ने कहा कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता भट्टाचार्य (79) ‘नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटरी सपोर्ट’ पर हैं और होश में हैं।
शहर के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज कर रहे चिकित्सकों की टीम के एक सदस्य ने कहा कि उन्हें ‘राइल्स ट्यूब’ के माध्यम से भोजन खिलाया जा रहा है और निगलने की प्रक्रिया का मूल्यांकन किया जा रहा है।
चिकित्सक ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “उनकी समग्र स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है… वह ठीक हैं और होश में हैं। वह चिकित्सकों और आगंतुकों से बात कर रहे हैं और घर लौटना चाहते हैं। उन्हें ‘नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटरी सपोर्ट’ पर रखा गया है। उनके रक्त संबंधी मापदंडों में सुधार हुआ है, लेकिन उन्हें शनिवार तक आईवी एंटीबायोटिक्स दवाएं दी जाएंगी।”
सांस लेने में तकलीफ के कारण भट्टाचार्य को 29 जुलाई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भट्टाचार्य ने पार्टी के वरिष्ठ नेता ज्योति बसु के स्थान पर 2000 में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का पदभार संभाला था।
वह 2011 तक मुख्यमंत्री पद पर रहे। उसी दौरान उद्योगों के लिये भू अधिग्रहण को लेकर ममता बनर्जी की अगुवाई में आंदोलन हुआ था।
वर्ष 2011 में राज्य की सत्ता गंवाने के बाद भट्टाचार्य नीत मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सत्ता में दोबारा वापसी नहीं कर पाई। राज्य में माकपा के 34 वर्षों के शासन को खत्म कर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सत्ता में आई और ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं।
पिछले कुछ वर्षों से भट्टाचार्य खराब स्वास्थ्य के कारण सामाजिक जीवन से दूर थे। वह अपने पाल एवेन्यू अपार्टमेंट में ही रहते थे।
उन्हें सार्वजनिक रूप से आखिरी बार तब देखा गया था जब वह 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में वाम दल की रैली में बिना बताए अचानक पहुंच गए थे और वह तब भी ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे।
उन्होंने 2015 में माकपा के पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी से इस्तीफा दे दिया था और फिर 2018 में पार्टी के राज्य सचिवालय की सदस्यता भी छोड़ दी थी।
भाषा जोहेब संतोष
संतोष

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