हरिद्वार में गंगनहर में चंडीगढ़ के चार नाबालिग कांवड़िए डूबे

Ads

हरिद्वार में गंगनहर में चंडीगढ़ के चार नाबालिग कांवड़िए डूबे

  •  
  • Publish Date - July 31, 2026 / 08:13 PM IST,
    Updated On - July 31, 2026 / 08:13 PM IST

हरिद्वार, 31 जुलाई (भाषा) उत्तराखंड में हरिद्वार के ज्वालापुर क्षेत्र में शुक्रवार को जटवाड़ा पुल के पास चंडीगढ़ निवासी 16 से 18 साल की उम्र के चार नाबालिग कांवड़ियों की गंगनहर में डूबने से मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी।

पुलिस के मुताबिक, चारों मृतकों के शव बरामद कर लिए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, सभी मृतक कांवड़ यात्रा पर हरिद्वार आए एक दल में शामिल थे और गंगा जल लेने के बाद वापस लौट रहे थे। लौटते समय रास्ते में जटवाड़ा पुल के पास गंगनहर के घाट पर ये लोग स्नान करने के लिए रुके और इसी दौरान एक कांवड़िया डूबने लगा। उसे बचाने के लिए उसके तीन साथी भी पानी में उतर गए, लेकिन उन्हें भी गहराई का अंदाजा नहीं लगा और वे चारों गंगनहर में लापता हो गए।

बताया जा रहा है कि गंगनहर में सिल्ट की सफाई के कारण जलस्तर कम होने से कांवड़िए बीच धारा तक चले गए थे और इसी दौरान फंसने से यह हादसा हुआ।

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही जल पुलिस और स्थानीय पुलिस सहित अन्य राहत-बचाव एजेंसियां मौके पर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया।

हरिद्वार के पुलिस अधीक्षक (नगर) अभय प्रताप सिंह ने बताया कि काफी देर तक चले अभियान के बाद चारों कांवड़ियों के शव गंगनहर से बरामद कर लिए गए। उन्होंने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है। मृतकों की पहचान चंडीगढ़ के सेक्टर 16 के निवासी शिवांशु (16), नीतेश (17) और भरत (17) तथा सेक्टर 26/30 के निवासी रोहित प्रजापति (18) के रूप में हुई है।

एक अन्य घटना हरिद्वार के कांगड़ा घाट पर हुई जहां गंगा के तेज बहाव में बह गए दो कांवड़ियों को राज्य आपदा प्रतिवादन बल की टीम ने बचा लिया। इनमें से एक की पहचान 18 वर्षीय सुधीश ठाकुर तथा दूसरे की पहचान बागपत निवासी 28 वर्षीय राहुल के रूप में हुई।

करीब एक पखवाड़े तक चलने वाली कांवड़ यात्रा की शुरूआत बृहस्पतिवार को हुई है। प्रदेश में इन दिनों हो लगातार हो रही बारिश के कारण गंगा नदी अपने पूरे उफान पर है।

इस संबंध में सिंह ने कहा कि कांवड़ मेले के दौरान पुलिस-प्रशासन लगातार श्रद्धालुओं से अपील कर रहा है कि वे केवल निर्धारित और सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करें तथा गंगा या गंगनहर की मुख्य धारा और गहरे पानी में जाने से बचें ताकि ऐसी दुखद घटनाओं से बचा जा सके।

भाषा सं दीप्ति आशीष

आशीष