नयी दिल्ली, आठ जुलाई (भाषा) कंबोडिया में अंगकोर वाट विरासत स्थल के प्रमुख हिस्सों के संरक्षण से लेकर श्रीलंका में भगवान शिव को समर्पित पांच प्राचीन मंदिरों में से एक के जीर्णोद्धार के लिए अनुदान सहायता प्रदान करने तक, भारत ने पिछले 12 वर्षों में अपनी ‘साझा सांस्कृतिक विरासत’ को पुनर्जीवित करने के लिए कई देशों की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
नयी दिल्ली की इस सांस्कृतिक कूटनीति में एक नया अध्याय जोड़ते हुए, भारत अब इंडोनेशिया के योग्याकार्ता में स्थित प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और जीर्णोद्धार में मदद करेगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) के इस विश्व धरोहर स्थल का दौरा किया और एक पट्टिका का अनावरण कर इस परियोजना का औपचारिक उद्घाटन किया।
इससे एक दिन पहले, भारत और इंडोनेशिया ने इस संयुक्त संरक्षण परियोजना को लेकर एक आशय पत्र का आदान-प्रदान किया था, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) भारतीय पक्ष की ओर से मुख्य एजेंसी होगी।
इसके अलावा, अधिकारियों ने बताया कि साल 2022 से भारत ने कंबोडिया में अंगकोर वाट विरासत परिसर के प्रमुख हिस्सों के संरक्षण और जीर्णोद्धार में मदद की है, जिसमें ता प्रोम, अंगकोर वाट और प्रीह विहियर शामिल हैं।
यह भारत के बाहर हिंदू सभ्यता के सबसे बड़े केंद्रों में से एक की स्थापत्य विरासत को सहेजने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सांस्कृतिक सहयोग के दायरे को और बढ़ाते हुए, भारत ने साल 2017 में म्यांमा के बागान पुरातात्विक क्षेत्र में भूकंप से क्षतिग्रस्त हुए स्मारकों के जीर्णोद्धार के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे और एएसआई के माध्यम से 12 ऐतिहासिक पगोडा (बौद्ध स्तूपों) के पुनरुद्धार का काम हाथ में लिया था। एक अधिकारी ने बताया कि भारत ने यहां ऐतिहासिक आनंद मंदिर के जीर्णोद्धार का काम भी पूरा कर लिया है।
इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर परिसर में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सांस्कृतिक विरासत अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के लोगों को आपस में जोड़ती है।
भाषा सुमित नरेश
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