Gaon Gwala Yojana: अब गाय चराने वालों को हर महीने इतना वेतन देगी सरकार, मंत्री ने नई योजना का किया ऐलान, आप भी कहेंगे-ये तो कमाल हो गया
Gaon Gwala Yojana: अक्सर आपने ग्वालों को गाय चराते देखा ही होगा। पर सोचिए, अगर ग्वालों को गाय चराने के लिए वेतन मिले तो! जी हां, खबर आ रही है कि, अब सरकार ग्वालों को गाय चराने पर वेतन देगी। चलिए विस्तार से पूरा मामला बताते हैं...
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- हर गांव में बनेगा ग्वाला
- गाय चराने पर मासिक वेतन
- 14 गांवों से शुरुआत
Gaon Gwala Yojana: कोटा: अक्सर आपने ग्वालों को गाय चराते देखा ही होगा। पर सोचिए, अगर ग्वालों को गाय चराने के लिए वेतन मिले तो! जी हां, खबर आ रही है कि, अब सरकार ग्वालों को गाय चराने पर वेतन देगी। राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कोटा जिले की रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र के खेड़ली गांव से “गोवर्धन गांव ग्वाला योजना” का विधिवत शुभारंभ किया है। चलिए विस्तार से पूरा मामला बताते हैं…
Gaon Gwala Yojana Rajasthan: गौ-पालन व्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए नई शुरुआत
कोटा जिले के रामगंजमंडी क्षेत्र में रविवार को पारंपरिक गौ-पालन व्यवस्था को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक नई पहल की शुरुआत हुई। चेचट तहसील के खेड़ली गांव से “गांव ग्वाल योजना” का शुभारंभ पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर और श्रीराम स्नेही संप्रदाय, शाहपुरा पीठ के पूज्य जगतगुरु स्वामी रामदयाल जी महाराज की मौजूदगी में किया गया। कार्यक्रम में सुबह करीब 10 बजे 14 चयनित गांव ग्वालों को मंच पर माला और साफा पहनाकर सम्मानित किया गया। फिलहाल योजना की शुरुआत रामगंजमंडी क्षेत्र के 14 गांवों से की गई है।
Gwala Yojana Rajasthan: प्रत्येक चयनित गांव में एक “गांव ग्वाला” नियुक्त किया जाएगा
योजना के तहत प्रत्येक चयनित गांव में एक “गांव ग्वाला” नियुक्त किया जाएगा, जो प्रतिदिन गांव के सभी गोवंश को एकत्रित कर गोचर भूमि तक चराने ले जाएगा और शाम को सुरक्षित वापस मालिकों तक पहुंचाएगा। इसके बदले गांव ग्वाले को प्रतिमाह 10 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा, जिसे गांव के लोग जनसहयोग से जुटाएंगे। मंत्री दिलावर ने बताया कि इससे गोपालन को संगठित स्वरूप मिलेगा, गोचर भूमि का बेहतर उपयोग होगा और ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
Sarkari Yojana: मंत्री दिलावर ने क्या कहा ?
मंत्री दिलावर ने कहा कि वर्तमान समय में चारागाह भूमि पर अतिक्रमण बढ़ने और गोवंश को खुला छोड़ने की प्रवृत्ति के कारण सड़क हादसे और पशु क्षति की समस्या बढ़ी है। विशेषज्ञों और अनुभवी पशुपालकों से चर्चा के बाद आजादी से पहले प्रचलित “गांव ग्वाल” परंपरा को आधुनिक रूप में फिर शुरू किया जा रहा है। पहले गांव का एक व्यक्ति सभी गायों को सामूहिक रूप से चराने ले जाता था और बदले में ग्रामीण उसे अनाज देते थे, लेकिन यह व्यवस्था समय के साथ समाप्त हो गई।
योजना के संचालन के लिए प्रत्येक गांव में एक समिति बनाई जाएगी, जिसमें सरपंच, वार्ड पंच, भामाशाह और ग्रामीण शामिल होंगे। यही समिति गांव ग्वाले का चयन करेगी, उसकी निगरानी रखेगी और मानदेय की व्यवस्था करेगी। योजना का उद्देश्य गोवंश को सड़कों पर भटकने से रोकना, गोचर भूमि को अतिक्रमण से बचाना और बेरोजगार ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार देना है। मंत्री दिलावर ने कहा कि कोटा से शुरू हुई यह पहल जल्द ही पूरे राजस्थान में लागू की जाएगी।
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