अत्यधिक नमक के सेवन के खतरों को लेकर जागरूकता फैला रही सरकार : नड्डा

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अत्यधिक नमक के सेवन के खतरों को लेकर जागरूकता फैला रही सरकार : नड्डा

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  • Publish Date - February 3, 2026 / 03:02 PM IST,
    Updated On - February 3, 2026 / 03:02 PM IST

नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने पाया है कि अत्यधिक नमक का सेवन देश में उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी रोगों के बढ़ते मामलों में एक कारण है।

राज्यसभा को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने मंगलवार को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी देते हुए बताया कि सरकार भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के माध्यम से ‘ईट राइट इंडिया’ मुहिम चला रही है, जिसका उद्देश्य स्वस्थ खानपान की आदतों को बढ़ावा देना और अधिक नमक सेवन के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना है।

उन्होंने बताया कि इस मुहिम के तहत प्रमुख गतिविधियों में जनसंचार माध्यमों और सोशल मीडिया के जरिए अभियान चलाना शामिल है। उन्होंने बताया कि इनमें ‘आज से थोड़ा कम’ जैसे अभियान शामिल हैं, जिनका उद्देश्य दैनिक आहार में नमक, चीनी और वसा की मात्रा को धीरे-धीरे कम करने के लिए लोगों को प्रेरित करना है। नड्डा के अनुसार, इसके साथ ही, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए ‘ईट राइट टूलकिट’ का विकास किया गया है, ताकि वे समुदायों को अधिक वसा, चीनी और नमक (एचएफएसएस) वाले खाद्य पदार्थों के सेवन को सीमित करने के बारे में परामर्श दे सकें।

नड्डा ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा, उनके प्रभाव और सुरक्षा के आकलन तथा अन्य प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने प्रतिदिन सोडियम सेवन को दो ग्राम से कम करने की सिफारिश की है।

उन्होंने कहा कि नमक का कम उपयोग करना सोडियम सेवन घटाने की समग्र रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि यदि नमक का उपयोग किया जाता है, तो डब्ल्यूएचओ कम सोडियम वाले ऐसे विकल्पों को अपनाने की सलाह देता है, जिनमें पोटैशियम शामिल हो।

उनके अनुसार, हालांकि यह सशर्त सिफारिश है जो सामान्य वयस्क आबादी के लिए है और गर्भवती महिलाओं, बच्चों, गुर्दे से संबंधित रोगों से पीड़ित व्यक्तियों या ऐसी अन्य स्थितियों वाले लोगों पर लागू नहीं होती, जिनमें पोटैशियम के निकलने से समस्या हो सकती है।

भाषा मनीषा माधव

माधव